عن علي رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إن لله ملائكة خلقوا من النور لا يهبطون إلا ليلة الجمعة ويوم الجمعة بأيديهم أقلام من ذهب ودويّ من فضّة وقراطيس من نور لا يكتبون إلا الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أخرجه الديلمي وسنده ضعيف …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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दुवा की सुन्नतें और आदाब – ५
(१) दुआ के शुरू में अल्लाह तआला की ह़म्द-ओ-सना बयान करें और उस के बाद नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम पर दुरूद भेजें, फिर इन्तिहाई आजिज़ी-व-ख़ाकसारी और अदब-ओ-आदर के साथ अल्लाह तआला के सामने अपनी ज़रूरतें पेश करें। हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह रद़िय अल्लाहु अन्हू फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा रसूलुल्लाह …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – १३
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात आठवीं अलामत: आठवीं अलामत यह है कि उसका यकीन और ईमान अल्लाह तआला शानुहू के साथ बढ़ा हुआ हो और इसका बहुत ज़्यादा एहतिमाम उसको हो। यकीन ही असल रासुल-माल है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का इर्शाद है कि यकीन ही पूरा ईमान है। हुजूर सल्लल्लाहु …
اور پڑھوहज़रत अबू-उबैदा रद़िय अल्लाहु अन्हु लोगो में एक बेहतरीन आदमी
हज़रत मुआज़ बिन जबल रद़िय अल्लाहु अन्हु ने हज़रत अबू-उबैदा रद़िय अल्लाहु अन्हु के बारे में फ़र्माया: واللَّه إنه لمن خيرة من يمشي على الأرض (الإصابة ٣/٤٧٧) अल्लाह की कसम! वो (अबू-उबैदा) बेहतरीन लोगों में से हैं जो इस वक़्त ज़मीन पर चल रहे हैं। हज़रत अबू-उबैदा रद़िय अल्लाहु अन्हु …
اور پڑھوइल्मे-दीन और ज़िक्रे-अल्लाह की अच्छी तरह पाबंदी करना
एक दिन फजर की नमाज़ के बाद, जबकि इस तहरीक में अमली हिस्सा लेने वालों का निजामुद्दीन की मस्जिद में बड़ा मज्मा था और हज़रत मौलाना (इलियास) रह़िमहुल्लाह की तबीयत इस क़दर कमज़ोर थी कि बिस्तर पर लेटे-लेटे भी दो-चार लफ़्ज़ (शब्द) आवाज़ से नहीं फरमा सकते थे, तो ज़ोर …
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