(१) रमज़ान से पेहले ही रमज़ान की तैयारी शुरू कर दी. बाज़ बुज़ुर्गाने दीन रमज़ान की तैयारी रमज़ान से छ महीने पेहले शुरू फ़रमा देते थे...
اور پڑھوमुलाक़ात के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “दो एसे मु…
मस्जिद में दाख़िल होने और मस्जिद से निकलने के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عن فاطمة رضي الله عنها قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل المسجد صلى على محمد وسلم وقال …
फ़ज़र की नमाज़ और मग़रिब की बाद सो (१००) बार दुरूद शरीफ़
तो हज़रत उम्मे सुलैम (रज़ि.) ने एक शीशी ली और उस में आप (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का मुबारक पसीना जम…
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के चार मुअज़्ज़िन
حظي أربعة من الصحابة رضي الله عنهم بشرف كونهم مؤذني رسول الله صلى الله عليه وسلم. اثنان عينهما رسول …
हज़रत जिब्रील ‘अलैहिस्सलाम और रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की बद-दुआ
जो बुलंद आवाज़ से दुरूद शरीफ़ पढ़ेगा, उस को जन्नत मिलेगी, तो में ने और मजलिस के दीगर लोगों ने भी बुल…
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दुवा की सुन्नतें और आदाब – ३
वो लोग जिनकी दुआ कुबूल होती है (१) मां-बाप, मुसाफिर और मज़लूम (पीड़ित) हज़रत अबू हुरैरा रदि अल्लाहु ‘अन्हु से रिवायत है कि हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: तीन दुआ ऐसी हैं कि वो ज़रूर कबूल की जाएगी: – बाप (या मां) की दुआ (उनकी अवलाद के …
اور پڑھوज़िकर करने और सही दीनी तालीम हासिल करने की अहमियत
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मैं शुरू में इस तरह जि़कर करने की तालीम देता हूं: हर नमाज़ के बाद “तस्बीहे़ फातिमा रदि अल्लाहु ‘अन्हा” और तीसरा कलिमा “سبحان الله والحمد لله ولا إلٰه إلا الله والله أكبر ولا حول ولا قوة إلا بالله” और …
اور پڑھوहज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से मोह़ब्बत करना ईमान की ‘अलामत है
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से फ़रमाया: لا يحبك إلا مؤمن، ولا يبغضك إلا منافق (أي حب سيدنا علي رضي الله عنه من علامات الإيمان، بشرط الإيمان بجميع أمور الدين الأخرى). (جامع الترمذي، الرقم: ٣٧٣٦) जो मोमिन होगा वो तुमसे मोहब्बत ही करेगा और …
اور پڑھوक़यामत की निशानियां – क़िस्त ५
दज्जाल के बारे में अहले सुन्नत वल-जमआत का ‘अकीदा दज्जाल की जाहिर होने और उसकी फितनो का जिक्र ‘अकाईद की किताबों में आया है। ‘उलमा ए ‘अकाईद इस बात पर सहमत हैं कि दज्जाल जाहिर होने पर ईमान रखना अहले सुन्नत वल-जमात की ‘अकीदों का हिस्सा है। वो हदीसें जिनमें …
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