क़िस्सा हज़रत अनस बिन नज़्र रज़ि० की शहादत का हजरत अनस बिन नज़्र रजि० एक सहाबी थे जो बद्र की लड़ाई में शरीक नहीं हो सके थे। उनको इस चीज का सदमा था, इस पर अपने नफ़्स को मलामत करते थे कि इस्लाम की पहली अज़ीमुश्शान लड़ाई और तू उसमें …
اور پڑھوमुलाक़ात के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “दो एसे मु…
मस्जिद में दाख़िल होने और मस्जिद से निकलने के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عن فاطمة رضي الله عنها قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل المسجد صلى على محمد وسلم وقال …
फ़ज़र की नमाज़ और मग़रिब की बाद सो (१००) बार दुरूद शरीफ़
तो हज़रत उम्मे सुलैम (रज़ि.) ने एक शीशी ली और उस में आप (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का मुबारक पसीना जम…
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के चार मुअज़्ज़िन
حظي أربعة من الصحابة رضي الله عنهم بشرف كونهم مؤذني رسول الله صلى الله عليه وسلم. اثنان عينهما رسول …
हज़रत जिब्रील ‘अलैहिस्सलाम और रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की बद-दुआ
जो बुलंद आवाज़ से दुरूद शरीफ़ पढ़ेगा, उस को जन्नत मिलेगी, तो में ने और मजलिस के दीगर लोगों ने भी बुल…
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फज़ाइले आमाल-१
दीन की खातिर सख़्तियों का बर्दाश्त करना और तकालीफ और मशक्कत का झेलना हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और सहाबा किराम रजि० ने दीन के फैलाने में जिस कदर तक्लीफें और मशक्कतें बर्दाश्त की हैं, उन का बर्दाश्त करना तो दरकिनार, उसका इरादा करना भी हम जैसे नालायकों से …
اور پڑھوमासिक धर्म के दौरान तवाफ़ ज़ियारत करना
सवाल: एक महिला हाइज़ा है (मासिक धर्म से गुजर रही है) और उसे तवाफ़-ए-ज़ियारत करना है, लेकिन वह वापसी की तारीख के बाद ही हैज़ (मासिक धर्म) से पाक होगी, जबकि उसके पास फ्लाइट बुक है, तो क्या उसके लिए गुंजाइश है कि हैज़ की हालत में तवाफ़-ए-ज़ियारत कर ले …
اور پڑھوतवाफ़-ए-ज़ियारत को क़ुर्बानी के दिनों के बाद तक अनावश्यक रूप से स्थगित करना
सवाल: अगर हाजी ने शरई उज़र के बिना कुर्बानी के दिनों के बाद तक तवाफ़-ए-ज़ियारत को टाल दिया, तो शरीयत में इस पर क्या हुक्म है? जवाब: ज़ियारत के तवाफ़ को बिना शरई उज़्र के कुर्बानी के दिनों के बाद तक टालना जायज़ नहीं है। अगर कोई देर करेगा तो …
اور پڑھوज़ियारत या उमरा का तवाफ़ बिना वज़ू किए करना
सवाल: अगर कोई शख्स बिना वुज़ू किये तवाफ़-ए-ज़ियारत या उमरे का तवाफ़ करे, तो शरीयत में उस का क्या हुक्म है? उत्तर: उस पर एक दम वाजिब होगा; अलबत्ता, अगर वह उस तवाफ़ को दोहरा ले, जो उसने वुज़ू के बगैर किया था, तो उस से दम गिर जाएगा। अल्लाह …
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