मस्जिद में बाजमाअत नमाज़ अदा करने की सुन्नत का प्रबंध मुहद्दिषे जलील, फ़क़ीहुल असर हज़रत मौलाना ख़लील अहमद (रह.) अपने ज़माने के बहोत बड़े वली थे. वह तबलीग़ के बानी हज़रत मौलाना मोहम्मद इल्यास कांधलवी (रह.) और मुहद्दिषे जलील हज़रत मौलाना शैख़ुल हदीष मोहम्मद ज़करिय्या कांधलवी (रह.) के शैख़ थे …
और पढ़ो »सुबह-शाम दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عَن ابي الدرداء رضي الله عنه قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم مَن صَلَّى عَلَيَّ حِينَ يُصْبِحُ…
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) का दुरूद
عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللهُ عَنهُمَا أَنَّهُ كَانَ إذَا صَلَّى عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَ…
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम के बहोत ज़्यादह ख़ुश होने का कारण
عن أبي طلحة الأنصاري رضي الله عنه قال أصبح رسول الله صلى الله عليه وسلم يوما طيب النفس يرى في وجهه ا…
क़यामत के दिन नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से ज़्यादा निकट शख़्स
عَن عَبدِ اللهِ بنِ مَسعُودٍ رَضِيَ اللهُ عَنهُ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيهِ وَ سَلَّم ق…
दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए ख़ुशख़बरी
عن عبد الرحمن بن عوف رضي الله عنه قال خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم فاتبعته حتى دخل نخلا فسجد فأط…
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मोहब्बत का बग़ीचा (पच्चीसवां प्रकरण)
بسم الله الرحمن الرحيم इस्लाम में ख़ैर ख़्वाही की महत्तवता इस्लाम की तमाम तालीमात (शिक्षाए) में से हर तालीम इन्तिहाई दिल आवेज़ और ख़ूबसूरती को ज़ाहिर करती है. बड़ों का अदब तथा एहतेराम करना, छोटों पर शफ़क़त तथा मेहरबानी करना और वालिदैन और अज़ीज़ो अक़ारिब के अधिकार को पूरा करना …
और पढ़ो »सहाबए किराम (रज़ि.) के लिए मोहब्बत
हज़रत जाफ़रूस साईग़(रह.) बयान करते हैं के हज़रत इमाम अहमद बिन हम्बल(रह.) के पड़ोस में एक आदमी रेहता था. जो बहुत से गुनाहों और बुराईयों में शामिल था. एक दिन वह आदमी हज़रत इमाम अहमद बिन हम्बल(रह.) की सभा में हाज़िर हुवा और सलाम किया. हज़रत इमाम अहमद बिन हम्बल(रह.)ने …
और पढ़ो »इख़्लास के साथ मुजाहदा करना
हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “अगर कोई शख़्स अपने को तबलीग़ का अहल नहीं समझता तो उस को बेठा रेहना हरगिज़ नहीं चाहिए, बलके उस को तो काम में लगने और दूसरों को उठाने की और ज़्यादा कोशिश करना चाहिए, बाज़ दफ़ा एसा होता है …
और पढ़ो »हज्ज और उमरह की सुन्नतें और आदाब – ११
नेक आमाल के ज़रीए नफ़ल हज्ज के षवाब का हुसूल अगर किसी शख़्स के पास हज्ज करने के लिए माली वुस्अत न हो, तो उस का यह मतलब नहीं है के एसे शख़्स के लिए दीनी तरक़्क़ी और अल्लाह तआला की मोहब्बत के हुसूल का कोई और तरीक़ा नहीं है, …
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