हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद रज़ियल्लाह अन्हु ने एक बार फ़र्माया: أخلائي من هذه الأمة ثلاثة: أبو بكر وعمر وأبو عبيدة بن الجراح رضي الله عنهم (فضائل الصحابة لأحمد بن حنبل، الرقم: ١٢٧٧) इस उम्मत में मेरे तीन खास दोस्त हैं: अबू-बक्र, उमर और अबू-उबैदह। हज़रत अबू-बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु की नज़र …
اور پڑھوमुसीबतों के वक़्त सब्र करना
हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: सब कारकुनों को समझा दो कि…
नबी ए करीम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की शफ़ाअत
नुज़हतुल मजालिस में लिखा है के बाज़ सुलहा में से एक साहब को हबसे बौल हो गया(पेशाब रूक गया). उन्होंने…
वफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
નવા લેખો
फज़ाइले-सदकात – १५
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात दसवीं अलामत: दसवीं अलामत यह है कि उसका ज़्यादा एहतिमाम उन मसाइल से हो जो आमाल से ताल्लुक रखते हों, जायज़ नाजायज़ से ताल्लुक रखते हों, फुलां अमल करना ज़रूरी है। इस चीज़ से फुलां अमल ज़ाया (बर्बाद) हो जाता है। (मसलन फ़ुलां चीज़ से नमाज़ …
اور پڑھوएक हज़ार दिन तक सत्तर फरिश्तों का सवाब लिखना
عن ابن عباس رضي الله عنهما قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم من قال جزى الله عنا محمدا بما هو أهله أتعب سبعين كاتبا ألف صباح (الطبراني في الأوسط رقم ٢٣٥ )
हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का इरशाद नक़ल करते हैं के जो शख़्स ये दुआ करें...
اور پڑھوबुज़्रगाने-दीन के नक्शेकदम पर चलने की खुब कोशिश करना
शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़कारिया रह़िमहुल्लाह ने एक बार इर्शाद फ़रमाया: अकाबिर के नक्शेकदम पर चलने की खूब कोशिश करो. इसमें मैंने बहुत बरकत देखी हैं.’ हज़रत गंगोही रह़िमहुल्लाह को मैंने खूब देखा। उसके बाद चार अकाबिर: हज़रत सहारनपुरी, हज़रत थानवी, हज़रत रायपुरी, हज़रत कांधलवी (हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब) …
اور پڑھوरसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की सिफ़ारिश
عَن رُوَيفِع بْنِ ثَابِت الأنصَارِي رَضِيَ اللهُ عَنهُ أًنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ صَلَّى عَلَى مُحَمَّدٍ وَقَالَ اَلَّلهُمَّ أَنْزِلْهُ المقعَدَ المقَرَّبَ عِنْدَكَ يَومَ القِيَامَة وَجَبَتْ لَهُ شَفَاعَتِي (مسند أحمد)
हज़रत रूवयफ़अ बिन अंसारी (रज़ि.) से रिवायत है के...
اور پڑھو
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી