हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक बड़े फ़ाज़िल यहां आए और मुझ से कहा कि कुछ नसीहत कीजिए। मैंने कहा कि आप तो खुद आलिम हैं। मैं आप को क्या नसीहत करूं? उन्होंने फिर इसरार किया। मैंने कहा: मुझे तो बस एक ही सबक …
اور پڑھوनबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम का सलाम करने वाले को जवाब देना
عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: ما من أحد يسلم علي إلا رد الله علي رو…
अमर बिल मरूफ और नही अनिल मुन्कर की जिम्मेदारी नौवीं क़िस्त
चार जिम्मेदारियाँ दीन की सुरक्षा की बुनियाद दुनिया में दीन कायम करने के लिए अल्लाह तआला ने रसूलुल्ला…
सूरह फ़लक की तफ़सीर
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ﴿١﴾ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣…
हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की मोहब्बत
عن سيدنا أبي الدرداء رضي الله عنه أنه قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم ليدني أبا ذر إذا حضر، وي…
इत्तिबा-ए-सुन्नत का एहतिमाम – ११
हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हज़रत हकीमुल-उम्मत मौलाना अशरफ़ ‘अ…
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फज़ाइले-आमाल – २४
तीसरा बाब सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम अज्मईन के ज़ुह्द्द और फ़क़र के बयान में इस बारे में खुद नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपना मामूल और वाक़िआत, जो इस अम्र पर दलालत करते हैं कि यह चीज हुज़र सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की खुद इख्तियार फ़रमायी हुई और पसन्द की हुई …
اور پڑھوक़यामत की निशानियां
दज्जाल के फ़ित्नो से कैसे बचें? मुबारक हदीसों में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने अपनी उम्मत को हर ज़माने के फ़ित्नो और खास तौर पर दज्जाल के फ़ित्नो से हिफाज़त का तरीका सिखाया है; चुनांचे एक हदीस शरीफ में है कि हज़रत उक़्बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु ने एक मर्तबा …
اور پڑھوदुरूदे इब्राहीम
عن عبد الرحمن بن أبي ليلى قال لقيني كعب بن عجرة فقال ألا أهدي لك هدية سمعتها من النبي صلى الله عليه وسلم فقلت بلى فأهدها لي فقال سألنا رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلنا يا رسول الله كيف الصلاة عليكم أهل البيت فإن الله قد علمنا كيف نسلم عليكم ...
اور پڑھوहज़रत तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु का अपना ‘अहद पूरा करना
रसूलु-ल्लाह सल्ल-ल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने एक बार फ़रमाया: طلحة ممن قضى نحبه (أي ممن وفوا بعهدهم من الثبات في مواطن القتال والاستعداد لبذل النفوس للدين) (جامع الترمذي، الرقم: ٣٢٠٣) तल्हा उन सहाबा में से हैं जिन्होंने अपना अहद (प्रतिज्ञा) पूरा किया (कि वो दीन के खातिर जंग के मैदान में …
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