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फज़ाइले-आमाल – ३२

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से मुहब्बत करने वाले पर फक्र की दौड़ एक सहाबी हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की खिदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया कि या रसूलुल्लाह! मुझे आपसे मुहब्बत है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फरमाया, देख क्या कहता है। उन्होंने फिर यही अर्ज़ किया कि मुझे …

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हैज़ की हालत में या जनाबत की हालत में कुरान-शरीफ़ का तर्जुमा पढ़ने का हुक्म

सवाल: अगर किसी ने हैज़ की हालत में या जनाबत की हालत में कुराने-करीम का तर्जुमा पढ़ा, लेकिन उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया; बल्कि, वह कोई ऐसा लेख पढ़ रहा था जिसमें कुराने-करीम की किसी आयत का तर्जुमा लिखा हुआ था। जवाब: हैज़ की हालत में या जनाबत की हालत …

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हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु का इस्लाम के खातिर तक्लीफें बर्दाश्त करना

خاطب سيدنا سعيد بن زيد رضي الله عنه الناس يوما فقال للقوم: لو رأيتني موثقي عمر (أي: وإن عمر لموثقي) على الإسلام أنا وأخته، وما أسلم (قبل أن يسلم) (صحيح البخاري، الرقم: ٣٨٦۲ ؛ ٣٨٦٧) हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु ने एक मर्तबा लोगों को मुखातिब करते हुए फरमाया: काश …

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कोहे हिरा का खुशी से झूमना

ذات مرة، صعد رسول الله صلى الله عليه وسلم جبل حراء فتحرك (الجبل ورجف)، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: اثبت حراء، فما عليك إلا نبي، أو صديق، أو شهيد وعدهم رسول الله صلى الله عليه وسلم: أبو بكر، وعمر، وعثمان، وعلي، وطلحة، والزبير، وسعد، وابن عوف، وسعيد بن …

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