हजीर जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जो व्यक्ति मुझ पर हर दिन सो (१००) बार दुरूद भेजता है, अल्लाह तआला उस की सो (१००) ज़रूरतें पूरी करेंगेः सत्तर (७०) ज़रूरतें उस के आख़िरत के जीवन के बारे में और तीस (३०) ज़रूरतें उस की दुनयवी जीवन से संबंधित.”...
اور پڑھوताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु का ज़बरदस्त इल्म
قال التابعي الجليل مسروق رحمه الله: لقد جالست أصحاب محمد صلى الله عليه وسلم، فوجدتهم كالإخاذ (الذي ي…
दुरूद-शरीफ का कई गुना सवाब
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من صلى علي عشرا صلى الله عليه مئة ومن صلى …
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – ३
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के लिए हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की इताअ़…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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ज़ुहर (Zuhr) से पहले की छूटी हुई सुन्नतें ज़ुहर के बाद अदा करना
सवाल: अगर ज़ुहर से पहले की चार रकात सुन्नतें मैंने नहीं पढ़ीं, तो मैं उन चार रकात सुन्नतों को कब पढूं? क्या ज़ुहर के बाद की दो रकात सुन्नतों से पहले पढूं या दो रकात सुन्नतों के बाद पढूं? जवाब: आप इन चार रकात सुन्नतों को दो रकात सुन्नतों के …
اور پڑھوहज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु के ग़ुस्ल में हज़रत साद बिन-अबी वक़्क़ास और हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु अन्हुम की शिरकत
لما توفي سيدنا سعيد بن زيد رضي الله عنه، كان سيدنا سعد بن أبي وقاص وسيدنا عبد الله بن عمر رضي الله عنهما ممن غسّله (من مجمع الزوائد، الرقم: ١٤٨٨٠ وصحيح البخاري، الرقم: ٣٩٩٠) जब हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु का इन्तिक़ाल हुआ, तो हज़रत साद बिन-अबी वक़्क़ास और हज़रत …
اور پڑھوसुन्नते-ए-मुअकद्दह न पढ़ने वाला
सवाल: अगर कोई आदमी सिर्फ फर्ज़ नमाज़ पढ़े और सुन्नते-ए-मुअकद्दह को पढ़ना छोड़ दे तो उसका क्या हुक्म है? क्या सुन्नते-ए-मुअकद्दह को छोड़कर सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना गुनाह है? जवाब: अगर कोई सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ पर बस करे और वाजिब नमाज़ (वित्र नमाज़) और सुन्नते-ए-मुअकद्दह न पढ़े तो गुनहगार होगा। …
اور پڑھوज़कात की सुन्नतें और आदाब – १
ज़कात इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान में से एक अहम रुकन है। ज़कात सन २ हिजरी में रमज़ान के रोज़े से पेहले फर्ज़ हूई थी। कुराने-करीम में बहुत सी आयत और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की बहुत सी हदीस में ज़कात अदा करने की फ़ज़ीलत और अज़ीम सवाब बयान किया …
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