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बदनसीब इन्सान

جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد شقي (عمل اليوم والليلة لابن السني، الرقم: ۳۸۱) हज़रत जाबिर रद़ियल्लाहु अन्हु ने हुज़ूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का यह इर्शाद नक़ल किया है कि जिसके सामने मेरा ज़िकर …

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ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १

मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़रूरत का ख़याल रखा गया है; चुनांचे इस्लाम ने हमें सिर्फ़ यह नहीं सिखाया कि हम कैसे इन्सान के साथ उस की ज़िंदगी में भलाई वाला सुलूक और मुआमला करें; बल्कि हमें यह …

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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के साथ हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु की क़ुरबत (नज़दीकी)

عن سيدنا أبي موسى الأشعري رضي الله عنه أنه قال: قدمت أنا وأخي من اليمن (إلى المدينة المنورة)، فمكثنا حينا ما نرى ابن مسعود وأمه إلا من أهل البيت، من كثرة دخولهم ولزومهم له (صحيح البخاري، الرقم: ٤٣٨٤) हज़रत अबू-मूसा अशअ़री रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं: “जब मैं और मेरा …

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बे-पर्दगी के ख़तरनाक नताइज (रिज़ल्ट)

हज़रत मौलाना अशरफ़ अ़ली थानवी रह़मतुल्लाहि अ़लैहि ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “जी हाँ! आज-कल बे-पर्दगी का ज़ोर है। बड़े फ़ित्ने का ज़माना है। यह एतिराज़ किया जाता है कि यह पर्दा औरतों को क़ैद में रखना है। मैं कहता हूँ कि यह क़ैद नहीं; बल्कि हिफ़ाज़त है, जो हर …

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फज़ाइले-आमाल – ४०

हज़रत अली रजि० का एक क़ब्र पर गुज़र कुमैल रजि० एक शख्स हैं, कहते हैं कि मैं हज़रत अली कर्रमल्लाहु बज्हहू के साथ एक मर्तबा जा रहा था। वह जंगल में पहुंचे, फिर एक मक्बरे की तरफ़ मुतवज्जह हुए और फ़रमाया: ऐ मक्बरे वालो! ऐ बोसीदगी वालो! एक वहशत और …

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