ذكر العلامة ابن الأثير رحمه الله أن سيدنا بلالا رضي الله عنه كان أول من أذن في الإسلام. وكان يؤذّن لرسول صلى الله عليه وسلم في حياته سفرا وحضرا (أسد الغابة ١/٢٤٣) ‘अल्लामा इब्ने-असीर रह़िमहुल्लाह ने ज़िक्र किया है कि हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु इस्लाम में सबसे पहले मुअज़्ज़िन थे, …
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22 hours ago
तीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में का…
22 hours ago
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मसऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम का एतेमाद (भरोसा)
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لو كنت مؤمرا أحدا (على جيش) من غير مشورة (الصحابة، عند صعوبة جمعهم…
2 days ago
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकू़क़
हम अपनी ज़िंदगी में हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के एहसानात का जायज़ा लें, तो हमें माल…
5 days ago
बदनसीब इन्सान
جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد…
7 days ago
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १
मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़…
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ज़कात की फर्ज़िय्यत और कर्ज़दार के उपर ज़कात
हज और उमरह के फज़ाइल
सज्दा-ए-तिलावत के मम्नू’ टाइम
सवाल: अगर कोई क़ुरआन मजीद की तिलावत करे और वह सज्दा की आयत पढ़े, तो वह किस वक़्त सज्दा-ए-तिलावत कर सकता है और किस वक़्त सज्दा-ए-तिलावत नहीं कर सकता है? जवाब: सज्दा-ए-तिलावत मकरूह वक़्त में करना मम्नू (मना) है। ये तीन वक़्त हैं: ज़वाल का वक़्त (जब सूरज ठीक सर …
اور پڑھوबीमार की मिज़ाजपुर्सी (عیادت) की सुन्नतें और आदाब – २
इयादते-मरीज़ के फज़ाइल सत्तर हज़ार फ़रिश्तों की दुआ का हुसूल हज़रत अली रद़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया: “जो शख़्स सुब्ह को किसी बिमार आदमी की इयादत करे, उस के लिए सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक अल्लाह तआला से रहमत की दुआ करेंगे और …
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