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बे-मुरव्वती और ना-शुक्री की अलामत

हज़रत क़तादा (रह.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) इरशाद फ़रमाया के “यह असभ्यता और नाशुकरी की बात है के किसी व्यक्ति के सामने मेरा तज़किरा किया जाए और वह मुझ पर दुरूद न भेजे.”...

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फज़ाइले-सदकात – २८

एक चरवाहे का तकवा नाफे रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु अन्हु एक दफा मदीना-मुनव्वरा से बाहर तशरीफ ले जा रहे थे, ख़ुद्दाम साथ थे, खाने का वक़्त हो गया। ख़ुद्दाम ने दस्तरख़्वान बिछाया। सब खाने के लिए बैठे। एक चरवाहा बकरियां चराता हुआ गुज़रा, उसने सलाम किया। …

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हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु की तवाज़ु

كان الناس يأتون سيدنا بلالا رضي الله عنه ويذكرون فضله وما قسم الله له من الخير، فيقول بتواضع: إنما أنا حبشي كنت بالأمس عبدا (طبقات ابن سعد ٣/١٨٠) जब लोग हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के पास आते और उन की खूबियां की तारीफ करते और इन खैर-ओ-भलाई का ज़िक्र करते, …

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