हज़रत क़तादा (रह.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) इरशाद फ़रमाया के “यह असभ्यता और नाशुकरी की बात है के किसी व्यक्ति के सामने मेरा तज़किरा किया जाए और वह मुझ पर दुरूद न भेजे.”...
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22 hours ago
तीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में का…
22 hours ago
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मसऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम का एतेमाद (भरोसा)
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لو كنت مؤمرا أحدا (على جيش) من غير مشورة (الصحابة، عند صعوبة جمعهم…
2 days ago
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकू़क़
हम अपनी ज़िंदगी में हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के एहसानात का जायज़ा लें, तो हमें माल…
5 days ago
बदनसीब इन्सान
جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد…
7 days ago
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १
मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़…
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क़र्ज़ की रकम पर ज़कात – १
हज और उमरह करने वालो के लिए नसीहत – २
फज़ाइले-सदकात – २८
एक चरवाहे का तकवा नाफे रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु अन्हु एक दफा मदीना-मुनव्वरा से बाहर तशरीफ ले जा रहे थे, ख़ुद्दाम साथ थे, खाने का वक़्त हो गया। ख़ुद्दाम ने दस्तरख़्वान बिछाया। सब खाने के लिए बैठे। एक चरवाहा बकरियां चराता हुआ गुज़रा, उसने सलाम किया। …
اور پڑھوहज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु की तवाज़ु
كان الناس يأتون سيدنا بلالا رضي الله عنه ويذكرون فضله وما قسم الله له من الخير، فيقول بتواضع: إنما أنا حبشي كنت بالأمس عبدا (طبقات ابن سعد ٣/١٨٠) जब लोग हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के पास आते और उन की खूबियां की तारीफ करते और इन खैर-ओ-भलाई का ज़िक्र करते, …
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