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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की सच्चाई के बारे में रसूले-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की गवाही

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ما أظلت الخضراء (أي: السماء) ولا أقلت الغبراء (أي: الأرض) أصدق من أبي ذر. (سنن الترمذي، الرقم: ٣٨٠١) एक मौका पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से ज़्यादा कोई सच्चा नहीं …

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अज़ान सुन कर दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

लोगों ने ख़ल्लाद बिन कषीर की बीवी से उस की वजह पूछी, तो उन्होंने जवाब दिया के उस का मामूल (नियम) था के हर जुम्आ को निम्नलिखित दुरूद को एक हज़ार मर्तबा पढ़ते थेः

اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ...

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तहज्जुद की नमाज़ के लिये बेदार होने के वक़्त दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

हज़रत जाबिर बिन समुरा (रज़ि.) से रिवायत है के नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के बेशक में मक्का मुकर्रमा के अन्दर इस पत्थर को पेहचानता हुं जो मुझे नुबुव्वत से पेहले सलाम किया करता था. बेशक में इस को अभी भी पेहचानता हुं....

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फ़र्ज़ नमाज़़ों के बाद दुरूद-शरीफ़ पढ़ना

हज़रत अनस (रज़ि.) के दिल में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इतनी ज़्यादा मोहब्बत थी के उन्होंने अपने आप को नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के बग़ैर इस दुन्या में रेहने के क़ाबिल नहीं समझा...

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