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ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना

“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल्लाह तआला के नज़दीक मक़बूलियत हासिल करने का ज़रीआ बनावो.”...

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अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना

ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा, उन को मक़ामे इल्लिय्यीन में बुलंद दरजा नसीब फ़रमा, मुनतख़ब (गिने चुने) बंदो के दिलों में उन की मोहब्बत ड़ाल दे और मुक़र्रब लोगों के साथ उन का ठिकाना बना...

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दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी

हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मुझ पर दुरूद भेजना पुल सिरात पर रोशनी (का बाइष) है और जो शख़्स जुम्आ के दिन अस्सी मर्तबा मुझ पर दुरूद भेजेगा, उस के अस्सी साल के गुनाह बख़्श दिए जाऐंगे...

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जुम्आ के दिन असर की नमाज़ के बाद अस्सी मर्तबा दुरूद शरीफ़ पढ़ने से अस्सी साल के गुनाहों की बख़शिश

दूरी की हालत में अपनी रूह को ख़िदमते अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) में भेजा करता था, वह मेरी नाईब बन कर आस्ताना मुबारक चूमती थी, अब जिस्मों की हाज़री की बारी आई है अपना दस्ते मुबारक अता कीजिये, ताकि मेरे होंठ उस को चूमें...

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जुम्आ के दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने की वजह से अस्सी (८०) साल के गुनाहों की माफ़ी और अस्सी (८०) साल की इबादतों का षवाब

जुम्आ के दिन असर की नमाज़ के बाद अपनी जगह से उठने से पेहले अस्सी (८०) मर्तबा नीचे लीखा हुवा दुरूद पढ़ता है उस के अस्सी (८०) साल के गुनाह माफ़ कर दिये जाते हैं और उस को अस्सी (८०) साल की इबादतों का षवाब मिलता हैः اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ وَعَلٰى آلِهِ وَسَلِّمْ تَسْلِيْمًا “ए अल्लाह ! उम्मी नबी मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) और उन की आलो औलाद पर ख़ूब ख़ूब दुरूदो सलाम भेज.”۔۔۔

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