सवाल – वुकूफ़े-अरफ़ा का मस्नून वक़्त कौन-सा है?
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3 days ago
वफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
6 days ago
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
6 days ago
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
6 days ago
अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना
ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा…
6 days ago
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मु…
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वुकूफे अरफा का वक्त (समय)
सवाल – वुकूफ़े-अरफ़ा का वक़्त कौन-सा है?
اور پڑھوएहराम बांधने के बाद सफर पर कादिर न होना
सवाल – एक आदमी ने हज या उमरह का एहराम बांध लिया, लेकिन उस को ऐसी बिमारी लग गई कि अब वह सफरे-हज पर नहीं जा सकता है, इस मस्अलह में शरीअत क्या कहती है? नीज़ ऐसा आदमी एहराम से कैसे निकलेगा?
اور پڑھوक्या उस औरत पर हज्ज फर्ज हे, जिस के पास महरम न हो
सवाल – एक औरत के पास हज करने की इस्तिता’अत (ताकत) है, मगर उस के साथ जानेवाला कोई महरम रिश्तेदार नहीं है, तो क्या उस पर हज फ़र्ज़ होगा?
اور پڑھوव्यापार संभालने के लिए मुनासिब (उपयुक्त) आदमी न मिलने की वजह से हज्ज बाद में अदा करना ?
सवाल – एक आदमी हज की इस्तिता’अत (ताकत) रखता है, लेकिन वो हज के लिए नहीं जा रहा है, क्योंकि उस को कोई ऐसा मुनासिब आदमी नहीं मिल रहा है, जो उस की गैर मौजुदगी में उस की तिजारत (व्यापार) संभाल सके. इस बारे में शरीअत क्या केहती है?
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