हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़मतुल्लाहि ‘अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: उम्मत की ख़िदमत और उनके दीन की हिफ़ाज़त करना चाहिए। अपनी शोहरत में क्या रखा है? शोहरत के मुताल्लिक़ तो बस यह मज़ाक़ (रग़बत,चाहत) चाहिए कि न ज़िंदगी में किसी को ख़बर हो कि फ़ुलां शख़्स भी दुनिया …
اور پڑھوतीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में का…
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मसऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम का एतेमाद (भरोसा)
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لو كنت مؤمرا أحدا (على جيش) من غير مشورة (الصحابة، عند صعوبة جمعهم…
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकू़क़
हम अपनी ज़िंदगी में हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के एहसानात का जायज़ा लें, तो हमें माल…
बदनसीब इन्सान
جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १
मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़…
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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों के साथ हुस्ने-सुलूक (अच्छा व्यवहार)
عن عيسى بن عميلة رحمه الله أنه قال: أخبرني من رأى أبا ذر يحلب غنيمة له، فيبدأ بجيرانه وأضيافه قبل نفسه. (من سير أعلام النبلاء ٣/٣٩٩) ईसा बिन-उमैलह रह़िमहुल्लाह ने एक ऐसे शख़्स से नक़ल किया है जिन्होंने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों और मेहमानों के साथ हुस्ने-सुलूक …
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की सच्चाई के बारे में रसूले-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की गवाही
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ما أظلت الخضراء (أي: السماء) ولا أقلت الغبراء (أي: الأرض) أصدق من أبي ذر. (سنن الترمذي، الرقم: ٣٨٠١) एक मौका पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से ज़्यादा कोई सच्चा नहीं …
اور پڑھوअज़ान सुन कर दुरूद-शरीफ़ पढ़ना
लोगों ने ख़ल्लाद बिन कषीर की बीवी से उस की वजह पूछी, तो उन्होंने जवाब दिया के उस का मामूल (नियम) था के हर जुम्आ को निम्नलिखित दुरूद को एक हज़ार मर्तबा पढ़ते थेः
اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ...
اور پڑھوतहज्जुद की नमाज़ के लिये बेदार होने के वक़्त दुरूद-शरीफ़ पढ़ना
हज़रत जाबिर बिन समुरा (रज़ि.) से रिवायत है के नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के बेशक में मक्का मुकर्रमा के अन्दर इस पत्थर को पेहचानता हुं जो मुझे नुबुव्वत से पेहले सलाम किया करता था. बेशक में इस को अभी भी पेहचानता हुं....
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