قال رسول الله صلى الله عليه وسلم للصحابة رضي الله عنهم: إن الله أمرني بحب أربعة وأخبرني أنه يحبهم، قيل: يا رسول الله سمّهم لنا فقال صلى الله عليه وسلم: علي منهم يقول ذلك ثلاثا وأبو ذر والمقداد وسلمان أمرني بحبهم وأخبرني أنه يحبهم (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧١٨) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु …
اور پڑھوताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु का ज़बरदस्त इल्म
قال التابعي الجليل مسروق رحمه الله: لقد جالست أصحاب محمد صلى الله عليه وسلم، فوجدتهم كالإخاذ (الذي ي…
दुरूद-शरीफ का कई गुना सवाब
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من صلى علي عشرا صلى الله عليه مئة ومن صلى …
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – ३
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के लिए हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की इताअ़…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की दुआ
तबूूक के मौक़े पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम ने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए ख़ास तौर पर दुआ फ़रमाई: يرحم الله أبا ذر “अल्लाह त’आला अबू-ज़र पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाए!” (अल-मुस्तदरक लिल-हाकिम, रक़म: ४३७३) इस दुआ का पसमंज़र हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मस्’ऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु फ़रमाते हैं: जब रसूले-करीम …
اور پڑھوक़ियामत की निशानियां – आठवीं क़िस्त
दज्जाल की आमद (आने) से पहले उम्मत का गिरना हदीस शरीफ़ में आया है कि क़ियामत से पहले लोगों की ज़िंदगी का सब से पहला मक़सद और असल मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा माल जमा करना होगा। लोग माल को इस निगाह से देखेंगे कि माल ही तमाम राहतों और आसानी …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: ८२)
“खलीलुल्लाह” के लक़ब से नवाज़ा जाना तमाम नबियों में से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को “खलीलुल्लाह” (अल्लाह के खास दोस्त) के खिताब से नवाज़ा गया। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को यह शर्फ कैसे मिला, इसके बारे में अल्लामा इब्ने-कसीर रह़िमहुल्लाह ने यह वाक्या बयान किया है: हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह आदत-ए-शरीफा …
اور پڑھوउम्मत का दुरूद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम तक पहुंचना
अपने घरों को क़ब्रस्तान न बनावो (घरों को नेक आमालः नमाज़, तिलावत और ज़िक्र वग़ैरह से आबाद रखो. उन को क़ब्रस्तान की तरह मत बनावो जहां नेक आमाल नही होते हैं) और मेरी क़बर को जशन की जगह मत बनावो और मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि तुम्हारा दुरूद मेरे पास (फ़रिश्तों के ज़रीए) पहोंचता है, चाहे तुम जहां कहीं भी हो...
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