(१) अगर बहोत सी क़ज़ा नमाज़ें एक साथ अदा की जाऐं, तो हर नमाज़ के अलग अलग अज़ान देना जाईज़ है और अगर तमाम क़ज़ा नमाज़ों के लिए एक ही अज़ान दी जाए, तो भी काफ़ी है. यहांतक के हर नमाज़ के लिए इक़ामत अलग होनी चाहिए...
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6 hours ago
तीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में का…
6 hours ago
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मसऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम का एतेमाद (भरोसा)
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لو كنت مؤمرا أحدا (على جيش) من غير مشورة (الصحابة، عند صعوبة جمعهم…
1 day ago
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकू़क़
हम अपनी ज़िंदगी में हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के एहसानात का जायज़ा लें, तो हमें माल…
4 days ago
बदनसीब इन्सान
جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد…
6 days ago
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १
मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़…
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किसी की तरफ़ से उस की इजाज़त के बग़ैर वाजिब क़ुर्बानी करना
सवाल – अगर किसी की वाजिब क़ुर्बानी उस की इजाज़त के बग़ैर कर दी जाये, तो क्या उस की वाजिब क़ुर्बानी दुरूस्त होगी?
اور پڑھوबारह (१२) ज़िल हिज्जा को क़ुर्बानी करना
सवाल – क्या बारह (१२) ज़िल हिज्जा को क़ुर्बानी दुरूस्त है?
اور پڑھوशहर में ईदुल अज़हा की नमाज़ की अदायगी से पहले गांव में कुर्बानी का जानवर ज़बह करना
सवाल – एक आदमी शहर में रेहता है. उस ने अपनी क़ुर्बानी का जानवर गांव में भेज दिया. वह जानवर गांव में शहर में ईद की नमाज़ होने से पेहले ज़बह कर दिया गया, तो क्या यह क़ुर्बानी दुरूस्त होगी?
اور پڑھوअल्लाह तआला का मख़लूक़ के साथ मामला
(१) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बंदो पर बेहद(असिमित) मेहरबान हैं. अपने बंदो से बेइन्तेहा मुहब्बत करने वाले हैं और अल्लाह तआला निहायत हलीम और बुर्दबार(सहिष्णु) हैं. गुनाहों को बख़्शने वाले हैं और तौबा करने वाले हैं...
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