इन्सान का क़याम ज़मीन के ऊपर बहोत कम है और ज़मीन के नीचे उस को उस से बहोत ज़्यादह क़याम करना है. या युं समझो के दुन्या में तुम्हारा क़याम है बहोत अल्प समय के लिए, और उस के बाद जिन जिन स्थानों पर ठहरना है...
اور پڑھوहज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु का ज़बरदस्त इल्म
قال التابعي الجليل مسروق رحمه الله: لقد جالست أصحاب محمد صلى الله عليه وسلم، فوجدتهم كالإخاذ (الذي ي…
दुरूद-शरीफ का कई गुना सवाब
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من صلى علي عشرا صلى الله عليه مئة ومن صلى …
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – ३
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के लिए हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की इताअ़…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
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निकाह़ की सुन्नतें और आदाब – १
निकाह हमारे रसूल (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम,) की मुबारक सुन्नतों में से हैं और अल्लाह तआला के बड़े इन्आमात में से भी हैं. क़ुर्आने मजीद में अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने निकाह को अपनी क़ुदरत की बड़ी निशानियों में से एक निशानी शुमार किया है...
اور پڑھوइमाम और मुक़तदी से संबंधित अहकाम
(१) जनाज़े की नमाज़ में इमाम और मुक़तदी दोनों तकबीरें कहेंगे और दुआऐं पढ़ेंगे. दोनों मे मात्र इतना फ़र्क़ है के इमाम तकबीरें और सलाम बुलंद आवाज़ से कहेंगे और मुक़तदी आहिस्ता आवाज़ से कहेंगे. जनाज़े की नमाज़ की दीगर चीज़ें (षना, दुरूद और दुआ) इमाम और मुक़तदी दोनों आहिस्ता पढ़ेंगे...
اور پڑھوदोस्ती और दुश्मनी में ऐअतेदाल(संयम) की ज़रूरत
हद से गुज़र कर हर चीज़ मज़मूम(निंदा के लाईक़) है. हदीष में तालीम (शिक्षा) है के हद से गुज़र कर दोस्ती मत करो मुमकिन है के किसी दीन नफ़रत हो जावे. इसी तरह हद से गुज़र कर दुश्मनी मत करो मुमकिन है के फिर तअल्लुक़ात(रिश्ते) दोस्ती के हो जाऐं...
اور پڑھوक़यामत के दिन से संबंधित अक़ाईद
(१) क़यामत जुम्आ के दिन वाक़िअ होगी. क़यामत का दिन इस दुनिया का आख़री दिन होगा. उस दिन में अल्लाह तबारक व तआला पूरी काईनात(सृष्टि) को तबाह व बरबाद कर देंगे. क़यामत का ज्ञान सिर्फ़ अल्लाह सुब्हानहु व तआला को है. अल्लाह तआला के अलावह कोई नही जानता है कब इस दुन्या का अंत होगा और कब क़यामत आएगी...
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