“दुनिया में कोई साधारण से साधारण काम भी सिद्धांत का पालन और उचित प्रकिया अपनाए बग़ैर नही होता. जहाज़, नाव, रेल, मोटर सब सिद्धांत से ही चलते हैं यहां तक की सालन रोटी तक भी सिद्धांत से ही पकती है.”
اور پڑھوहज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु के इल्मे-दीन को फैलाना
لما دخل سيدنا علي رضي الله عنه الكوفة وشاهد علم أهلها، قال: أصحاب عبد الله سرج هذه القرية (في نشر عل…
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु के लिए रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम की मोहब्बत
قال سيدنا عمرو بن العاص رضي الله عنه: سأحدثك برجلين (معينين) مات رسول الله صلى الله عليه وسلم وهو يح…
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – २
पुख़्ता ईमान और कामिल यक़ीन का फ़रीज़ा दूसरा फ़रीज़ा यह है कि हम नबी करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम …
हज़रत उ़मर रज़ियल्लाहु अ़न्हु की ज़बान से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु के अज़ीम इल्म की तारीफ़
في إحدى المرّات، سُئل سيّدنا عمر رضي الله عنه عن مسألة، وكان سيّدنا عبد الله بن مسعود رضي الله عنه ج…
गुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
નવા લેખો
निकाह की सुन्नतें और आदाब – २
निकाह का मुख्य उद्देश्य यह हे के मियां-बीवी पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारें और एक दूसरे की सहायता करें अल्लाह तआला के हुक़ूक़(अधिकार) और हुक़ूक़े ज़वजिय्यत(वैवाहिक अधिकार) पूरा करने में...
اور پڑھوजनाज़े की नमाज को दोहराना
जब एक मर्तबा जनाज़े की नमाज़ अदा की जाए, तो दोबारा जनाजे की नमाज़ अदा करना जाईज़ नहीं है. मगार यह के अगर मय्यित का वली हाज़िर नहीं था और जनाज़े की नमाज़ उस की इजाज़त के बग़ैर अदा की गई हो, तो वली के लिए जनाज़े की नमाज़ का दोहराना दुरूस्त है...
اور پڑھوहिकमत की बात
“एक साहब ने बड़ी हिकमत की बात कही सोने के पानी से लिखने के क़ाबिल है वह यह के अगर बच्चा(बालक) किसी चीज़ को मांगे तो या तो उस की दरख़्वासत को शुरू ही में पूरी कर दे और यदी अगर पेहली बार में इनकार(मना) कर दिया तो फिर चाहे बच्चा(बालक) कितनी ही ज़िद करे कदापी उस की ज़िद पूरी न करे वरना आईन्दा उस को यही आदत पड़ जाएगी”...
اور پڑھوमुहब्बत का बग़ीचा
आज भी अगर मुसलमान अपने अख़लाक़ तथा आदतों और अपनी ज़िंदगी को रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के शिक्षणों तथा हिदायात(बताई हुई बातों) पर अमल कर लें, तो आंखों ने जो मन्ज़र सहाबए किराम के ज़माने में देखा था, इस दौर में भी वो मन्ज़र नज़र आएगा...
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