निकाह का मुख्य उद्देश्य यह हे के मियां-बीवी पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारें और एक दूसरे की सहायता करें अल्लाह तआला के हुक़ूक़(अधिकार) और हुक़ूक़े ज़वजिय्यत(वैवाहिक अधिकार) पूरा करने में...
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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जनाज़े की नमाज को दोहराना
जब एक मर्तबा जनाज़े की नमाज़ अदा की जाए, तो दोबारा जनाजे की नमाज़ अदा करना जाईज़ नहीं है. मगार यह के अगर मय्यित का वली हाज़िर नहीं था और जनाज़े की नमाज़ उस की इजाज़त के बग़ैर अदा की गई हो, तो वली के लिए जनाज़े की नमाज़ का दोहराना दुरूस्त है...
اور پڑھوहिकमत की बात
“एक साहब ने बड़ी हिकमत की बात कही सोने के पानी से लिखने के क़ाबिल है वह यह के अगर बच्चा(बालक) किसी चीज़ को मांगे तो या तो उस की दरख़्वासत को शुरू ही में पूरी कर दे और यदी अगर पेहली बार में इनकार(मना) कर दिया तो फिर चाहे बच्चा(बालक) कितनी ही ज़िद करे कदापी उस की ज़िद पूरी न करे वरना आईन्दा उस को यही आदत पड़ जाएगी”...
اور پڑھوमुहब्बत का बग़ीचा
आज भी अगर मुसलमान अपने अख़लाक़ तथा आदतों और अपनी ज़िंदगी को रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के शिक्षणों तथा हिदायात(बताई हुई बातों) पर अमल कर लें, तो आंखों ने जो मन्ज़र सहाबए किराम के ज़माने में देखा था, इस दौर में भी वो मन्ज़र नज़र आएगा...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-२)
हज़रत अबू क़तादा (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जब तुम में से कोई मस्जिद में दाख़िल हो, तो उसे चाहिए के बैठने से पेहले दो रकात नमाज़ अदा करे.”...
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