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अल्लाह तआला का मख़लूक़ के साथ मामला

(१) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बंदो पर बेहद(असिमित) मेहरबान हैं. अपने बंदो से बेइन्तेहा मुहब्बत करने वाले हैं और अल्लाह तआला निहायत हलीम और बुर्दबार(सहिष्णु) हैं. गुनाहों को बख़्शने वाले हैं और तौबा करने वाले हैं...

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अज़ान और इक़ामत की सुन्नतें और आदाब-(भाग-१२)

अज़ान देने के समय निम्नलिखित सुन्नतों और आदाब का लिहाज़ रखा जाए (१) अज़ान और इक़ामत के दरमियान इतना वक़फ़ा(अंतर) करना के लोग अपनी ज़रूरियात से फ़ारिग़ हो कर नमाज़ के लिए मस्जिद आ सकें.[१] عن جابر رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال لبلال: إذا …

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क़ुर्बानी के जानवर में अक़ीक़े की निय्यत करना

सवाल – अगर क़ुर्रबानी के शुरका (भागीदारो) में से कोई शरीक (भागीदार) क़ुर्रबानी की निय्यत न करे, बल्के अक़ीक़े की निय्यत करे, तो क्या सब शुरका (भागीदारो) की क़ुर्बानी दुरूस्त होगी?

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क़ुर्बानी के शुरका(प्रतिभागियों) में से किसी प्रतिभागि का केवल गोश्त प्राप्त करने की निय्यत करना

सवाल – अगर क़ुर्बानी के शुरका (भागीदारों) में से किसी शरीक (भागीदार) की निय्यत सिर्फ गोश्त हासिल करने की हो, तो क्या तमाम शुरका (भागीदारों) की क़ुर्बानी फ़ासिद (ख़राब) हो जायेगी?

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