નવા લેખો

अज़ान और इक़ामत की सुन्नतें और आदाब-(भाग-१३)

(१) अगर बहोत सी क़ज़ा नमाज़ें एक साथ अदा की जाऐं, तो हर नमाज़ के अलग अलग अज़ान देना जाईज़ है और अगर तमाम क़ज़ा नमाज़ों के लिए एक ही अज़ान दी जाए, तो भी काफ़ी है. यहांतक के हर नमाज़ के लिए इक़ामत अलग होनी चाहिए...

اور پڑھو

शहर में ईदुल अज़हा की नमाज़ की अदायगी से पहले गांव में कुर्बानी का जानवर ज़बह करना

सवाल – एक आदमी शहर में रेहता है. उस ने अपनी क़ुर्बानी का जानवर गांव में भेज दिया. वह जानवर गांव में शहर में ईद की नमाज़ होने से पेहले ज़बह कर दिया गया, तो क्या यह क़ुर्बानी दुरूस्त होगी?

اور پڑھو

अल्लाह तआला का मख़लूक़ के साथ मामला

(१) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बंदो पर बेहद(असिमित) मेहरबान हैं. अपने बंदो से बेइन्तेहा मुहब्बत करने वाले हैं और अल्लाह तआला निहायत हलीम और बुर्दबार(सहिष्णु) हैं. गुनाहों को बख़्शने वाले हैं और तौबा करने वाले हैं...

اور پڑھو