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तकलीफ़ का कारण न बनना

इस ज़माने में दुरूद शरीफ़ और इस्तिग़फ़ार की कषरत रखी जावे और उस की कोशिश की जावे के किसी रफ़ीक़(साथी) को मेरी तरफ़ से तकलीफ़ न पहुंचे और अगर किसी की तरफ़ से हक़ तलफ़ी(किसी को उन के अधिकारो से वंचित करना) और तअद्दी(अन्याय) हो तो उस पर इल्तिफ़ात(ध्यान) न किया जावे...

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सुरए द़ुहा की तफ़सीर

इस्लाम के शरूआत में जब के रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) मक्का मुकर्रमा में थे चन्द दिनों तक अल्लाह तआला की तरफ़ से वही का सिलसिला मौक़ूफ़ हो गया(रूक गया), तो कुछ काफ़िरों ने आप(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को यह ताना देना शुरू कर दिया के...

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हर शख़्स को अपनी इस़लाह़ की फ़िकर की ज़रूरत है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी(रह.) ने एक मर्तबा फ़रमायाः आजकल यह मर्ज़(रोग) भी आम(सामान्य) हो गया है के अकषर लोग दूसरों के पीछे पड़े हुए हैं अपनी मुत़लक़ फ़िकर नहीं...

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फ़रिश्तों से सम्बंधित अक़ाईद(मान्यता)

(१) फ़रिश्ते अल्लाह तआला के मासूम बंदे हैं और नूर से पैदा किए गए हैं. फ़रिश्ते हमें नज़र नहीं आ सकते हैं और वह न तो मुज़क्कर(मर्द) हैं और न ही मुअन्नष(औरत) हैं. तथा फ़रिश्ते इन्सानी ज़रूरतों(खाना, पीना और सोना वग़ैरह) से पाक हैं...

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मसाईले मुतफ़र्रिक़ा(विविध मसाईल)

जुता, चप्पल पहन कर जनाज़े की नमाज़ अदा करना अगर जनाज़े की नमाज़ जुता/चप्पल पहन कर अदा की जाए, तो इस बात का लिहाज़ रख्खा जाए के जुता/चप्पल और ज़मीन दोनों पाक हों. और अगर कोई जुता निकाल कर उस पर खड़े हो कर नमाज़ अदा करे, तो ज़रूरी है के जुता/चप्पल पाक हो...

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