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सवारी में बैठ कर जनाज़े की नमाज़ अदा करने का हुक्म

एक वक़्त में अनेक मुरदों की जनाज़े की नमाज़ अदा करने का हुक्म

अगर एक वक़्त में बहोत सारे जनाज़े आ जाऐं, तो हर मय्यित की अलग अलग जनाज़े की नमाज़ अदा करना बेहतर है, लेकिन तमाम मुरदों की एक साथ एक जनाज़े की नमाज़ अदा करना भी जाईज़ है...

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वालिदैन के इन्तिक़ाल के बाद उनकी आझाकारिता का तरीक़ा

“जिस किसी ने अपने माता-पिता की ज़िंदगी में उन की सेवा तथा आझा का पालन न किया हो बाद में उन के इन्तिक़ाल के बाद उस की तलाफ़ी (प्रायश्र्वित) की शकल भी हदीष से षाबित है. वह यह के...

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सुरए तीन की तफ़सीर

क़सम है इन्जीर की और ज़ैतून की (१) और तूरे सीनीन (सयना के पहाड़) की (२) और इस अमन वाले शहर की(मक्का मुअज़्ज़मा की) (३)...

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मस्जिद में जनाज़े की नमाज़ अदा करने का हुकम

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जिस ने मस्जिद के अंदर जनाज़े की नमाज़ अदा की, उस को कुछ भी षवाब नहीं मिलेगा.”...

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आख़िरत की तय्यारी

इन्सान का क़याम ज़मीन के ऊपर बहोत कम है और ज़मीन के नीचे उस को उस से बहोत ज़्यादह क़याम करना है. या युं समझो के दुन्या में तुम्हारा क़याम है बहोत अल्प समय के लिए, और उस के बाद जिन जिन स्थानों पर ठहरना है...

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