निकाह का मुख्य उद्देश्य यह हे के मियां-बीवी पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारें और एक दूसरे की सहायता करें अल्लाह तआला के हुक़ूक़(अधिकार) और हुक़ूक़े ज़वजिय्यत(वैवाहिक अधिकार) पूरा करने में...
اور پڑھوमुलाक़ात के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “दो एसे मु…
मस्जिद में दाख़िल होने और मस्जिद से निकलने के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عن فاطمة رضي الله عنها قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل المسجد صلى على محمد وسلم وقال …
फ़ज़र की नमाज़ और मग़रिब की बाद सो (१००) बार दुरूद शरीफ़
तो हज़रत उम्मे सुलैम (रज़ि.) ने एक शीशी ली और उस में आप (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का मुबारक पसीना जम…
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के चार मुअज़्ज़िन
حظي أربعة من الصحابة رضي الله عنهم بشرف كونهم مؤذني رسول الله صلى الله عليه وسلم. اثنان عينهما رسول …
हज़रत जिब्रील ‘अलैहिस्सलाम और रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की बद-दुआ
जो बुलंद आवाज़ से दुरूद शरीफ़ पढ़ेगा, उस को जन्नत मिलेगी, तो में ने और मजलिस के दीगर लोगों ने भी बुल…
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जनाज़े की नमाज को दोहराना
जब एक मर्तबा जनाज़े की नमाज़ अदा की जाए, तो दोबारा जनाजे की नमाज़ अदा करना जाईज़ नहीं है. मगार यह के अगर मय्यित का वली हाज़िर नहीं था और जनाज़े की नमाज़ उस की इजाज़त के बग़ैर अदा की गई हो, तो वली के लिए जनाज़े की नमाज़ का दोहराना दुरूस्त है...
اور پڑھوहिकमत की बात
“एक साहब ने बड़ी हिकमत की बात कही सोने के पानी से लिखने के क़ाबिल है वह यह के अगर बच्चा(बालक) किसी चीज़ को मांगे तो या तो उस की दरख़्वासत को शुरू ही में पूरी कर दे और यदी अगर पेहली बार में इनकार(मना) कर दिया तो फिर चाहे बच्चा(बालक) कितनी ही ज़िद करे कदापी उस की ज़िद पूरी न करे वरना आईन्दा उस को यही आदत पड़ जाएगी”...
اور پڑھوमुहब्बत का बग़ीचा
आज भी अगर मुसलमान अपने अख़लाक़ तथा आदतों और अपनी ज़िंदगी को रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के शिक्षणों तथा हिदायात(बताई हुई बातों) पर अमल कर लें, तो आंखों ने जो मन्ज़र सहाबए किराम के ज़माने में देखा था, इस दौर में भी वो मन्ज़र नज़र आएगा...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-२)
हज़रत अबू क़तादा (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जब तुम में से कोई मस्जिद में दाख़िल हो, तो उसे चाहिए के बैठने से पेहले दो रकात नमाज़ अदा करे.”...
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