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सूरह फ़लक की तफ़सीर

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ‎﴿١﴾‏ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ‎﴿٢﴾‏ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ‎﴿٣﴾‏ وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ‎﴿٤﴾‏ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ‎﴿٥﴾‏ आप (ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम! लोगों से) कह दीजिए कि मैं पनाह मांगता हूं सुबह के रब की (१) हर चीज़ के शर से जो उसने बनाई (२) और अंधेरी …

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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की मोहब्बत

عن سيدنا أبي الدرداء رضي الله عنه أنه قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم ليدني أبا ذر إذا حضر، ويفتقده إذا غاب (مسند الشاميين، الرقم: ١٤٦٤) हज़रत अबू-दर्दा रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया: “जब हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु हाज़िर होते थे, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम उन्हें अपने क़रीब …

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फज़ाइले-सदकात – ३०

अब्दुल हमीद बिन-सा’द की सखावत एक मर्तबा मिसर में कहत पड़ा। अब्दुल हमीद बिन-सा’द मिस्र के हाकिम थे, कहने लगे: मैं शैतान को बताऊँगा कि मैं उसका दुश्मन हूँ (वह ऐसे वक़्त में बहुत एहतियात से ख़र्च करने की तर्गीब देता है।)मिस्र में जितने फुकरा नादार थे, सबका खाना मेरे …

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इत्तिबा-ए-सुन्नत का एहतिमाम – ११

हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हज़रत हकीमुल-उम्मत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हाल के ज़माने के एक बहुत बड़े आलिमे-दीन और बुज़ुर्ग थे। हज़रत रह़्मतुल्लाही ‘अलैह सन १२८० हिजरी में थाना भवन में पैदा हुए और १६ रजब १३६२ हिजरी (मुताबिक २० जुलाई १९४३) को ८३ साल …

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फ़ज्र की सुन्नतों की क़ज़ा

सवाल: अगर मेरी फ़ज्र की नमाज़ क़ज़ा हो जाए और मैं सोकर उठने के बाद उसे ज़ुहर से पहले (यानी ज़वाल से पहले) पढ़ूँ, तो क्या मैं पहले फ़ज्र की दो रकात सुन्नत पढ़ूँ और फिर फ़र्ज़, या सिर्फ़ फ़र्ज़ पढ़ूँ? जवाब: अगर कोई आदमी उसी दिन की फ़ज्र की …

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