بسم الله الرحمن الرحيم जन्नत की कुंजी इस्लाम ही वह वाहिद मज़हब है जो अल्लाह तआला से मुहब्बत का रास्ता सिखाता है और जन्नत तक ले जाता है. इस्लामी तालीमात पर अमल करने से बंदे को अल्लाह तआला की ख़ुश्नुदी और दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मिलती है. इस्लाम के …
اور پڑھوहज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) – मोअज़िनों के सरदार
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: نعم المرء بلال، ولا يتبعه إلا مؤمن، وهو سيد المؤذنين (من أمتي)، وا…
फ़रिश्तों का नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में दुरूदो सलाम पहोंचाना
“नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की उम्मत में से जो शख़्स भी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम)…
जुम्आ के दिन कषरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की दुआ
हज़रत उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया …
दुरूद शरीफ़ जमा करने के लिए फ़रिश्तों का दुनिया में सैर करना
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाय…
दुआ से पेहले दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) …
નવા લેખો
ग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-१
ग़ुसल करने का मस्नून तरीक़ा (१) ग़ुसल के दौरान क़िब्ला का इस्तेक़बाल न करना(क़िब्ले की तरफ़ मुंन न करना).[1] (२) ऐसी जगह ग़ुसल करना, जहां किसी की नज़र न पड़े. बेहतर यह है के ग़ुसल के समय सतर के हिस्से को ढ़ांप लिया जाए. अलबत्ता अगर कोई एसी जगह ग़ुसल …
اور پڑھوसूरतुल बय्यिनह की तफ़सीर
जो लोग एहले किताब और मुशरिकों में से काफ़िर थे वह बाज़ आने वाले न थे, जब तक के उन के पास एक वाज़िह दलील (स्पष्ट तर्क) न आती (१) (यअनी) अल्लाह का एक रसूल, जो पाक सहीफ़े पढ़ कर सुनाए (२) जिन में दुरूस्त मज़ामीन लिखे हों (३) और जो लोग एहले किताब थे वह इस वाज़िह दलील (स्पष्ट तर्क) के आने के बाद ही मुख़तलिफ़ हुए (४)...
اور پڑھوसुलहा की सूरत इख़्तियार करने में भी फ़ाईदा है
तो दोस्तो ! सूरत बना लो, अल्लाह तआला हिफ़ाज़त भी करेगा और तरक़्क़ी भी मिलेगी. बेटिकट अन्दर भी चले गए, सब ही कुछ हुवा...
اور پڑھوसदक़ए फ़ित्र में गेहुं और जौ की क़ीमत अदा करना
सवाल – क्या सदक़ए फ़ित्र की अदायगी के लिए गेहुं और जौ ही देना ज़रूरी है या इन दोनों की क़ीमत देना भी जाईज़ है?
اور پڑھو
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી