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सूरतुल ज़िलज़ाल की तफ़सीर

जब ज़मीन अपनी सख़्त जुम्बिश से हिला दी जाएगी (१) और ज़मीन अपने बोझ बाहर निकाल फेंकेगी (२) और इस हालत को देख कर काफ़िर आदमी कहेगा इस को क्या हुवा...

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ग़ुसल की सुन्नतें और आदाब-४

(१) ग़ुसल के दौरान पानी बरबाद न करें. न तो बहोत ज़्यादह पानी इस्तेमाल करें और न इतना कम पानी इस्तेमाल करें के पूरे तौर पर बदन को धोना मुमकिन न हो...

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मोहब्बत का बग़ीचा (नवां प्रकरण)‎

بسم الله الرحمن الرحيم अल्लाह तआला और मख़लूक़ की अमानत अदा करने की महत्तवता अज्ञानता का युग और इस्लाम की शरूअत में उषमान बिन तलहा ख़ानऐ काअबा की चाबी के ज़िम्मेदार थे. उन का मामूल था के वह हर हफ़्ते पीर और जुमेरात के दिन ख़ानए काअबा का दरवाज़ा खोलते …

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दीन के काम की बरकात

हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा फ़रमायाः “असल तो यही है के रज़ाए इलाही और उख़रवी अजर ही के लिए दीनी काम किया जाए, लेकिन तरग़ीब में मोक़े के हिसाब से दुन्यवी बरकात का भी ज़िक्र करना चाहिए. बाज़ आदमी एसे होते हैं के शुरूआतमें दुन्यवी बरकात ही …

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