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सुरए तकाषुर की तफ़सीर

بِسۡمِ اللّٰہِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِیۡمِ اَلۡہٰکُمُ  التَّکَاثُرُ ۙ﴿۱﴾ حَتّٰی زُرۡتُمُ  الۡمَقَابِرَ ؕ﴿۲﴾ کَلَّا  سَوۡفَ تَعۡلَمُوۡنَ ۙ﴿۳﴾ ثُمَّ  کَلَّا سَوۡفَ تَعۡلَمُوۡنَ ؕ﴿۴﴾ کَلَّا لَوۡ تَعۡلَمُوۡنَ عِلۡمَ  الۡیَقِیۡنِ ؕ﴿۵﴾ لَتَرَوُنَّ  الۡجَحِیۡمَ ۙ﴿۶﴾ ثُمَّ لَتَرَوُنَّہَا عَیۡنَ الۡیَقِیۡنِ ۙ﴿۷﴾ ثُمَّ لَتُسۡـَٔلُنَّ یَوۡمَئِذٍ عَنِ النَّعِیۡمِ ﴿۸﴾ ‎ एक दूसरे से ज़्यादा (दुनयवी साज़ो सामान) हासिल करने …

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अल्लाह तआला से हंमेशा हुस्ने ज़न की ज़रूरत

जब बंदे के ऊपर अल्लाह तआला के हर क़िसम के एहसानात हैं और फिर भी बंदा अल्लाह तआला के साथ अपना गुमान नेक न रखे, बलके यही ख़्याल करता रहे के अल्लाह तआला मुझ से नाराज़ हैं, तो यह कितना बुरा ख़्याल है...

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नमाज़ की सुन्नतें और आदाब – २

तकबीरे तहरीमा केहते वक़्त अपने सर को सीधा रखें. तकबीरे तहरीमा केहते वक़्त अपने सर को न तो आगे की तरफ़ झुकायें और न पीछे की तरफ़, बलके बिलकुल सीधा रखें...

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मोहब्बत का बग़ीचा (चौदहवां प्रकरण)‎

जब इन्सान शरीअत के मुताबिक़ जिवन गुज़ारता है, तो उस को हक़ीक़ी ख़ुशी और मसर्रत हासिल होती है, अगर चे उस के पास मालो दौलत ज़्यादा न हो और अगर वह शरीअत के मुताबिक़ ज़िन्दगी न गुज़ारे, तो उस को हक़ीक़ी ख़ुशी हरगिज़ हासिल नहीं होगी, अगर चे उस के पास बे पनाह मालो दौलत हो...

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