सहाबए किराम (रज़ि.) के दिलों में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की बे पनाह मोहब्बत...
اور پڑھوताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु का ज़बरदस्त इल्म
قال التابعي الجليل مسروق رحمه الله: لقد جالست أصحاب محمد صلى الله عليه وسلم، فوجدتهم كالإخاذ (الذي ي…
दुरूद-शरीफ का कई गुना सवाब
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من صلى علي عشرا صلى الله عليه مئة ومن صلى …
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – ३
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के लिए हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की इताअ़…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
નવા લેખો
उस्ताद की बे-अदबी इल्म से महरूमी का सबब
शेख़ुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़्मतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “मेरी बड़े एहतिमाम से तुम लोगों से दरख़्वास्त है कि इल्म हासिल करने में जितनी भी तवाज़ु हो सके (करना), ज़बानी नहीं, बल्कि दिल से इख़्तियार करना। अगर चाहो कि इल्म हासिल हो जाए, तो उस्ताद का अदब …
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु के दिल में अल्लाह तअ़ाला के सामने हिसाब का ख़ौफ़
قال سيدنا أبو ذر رضي الله عنه من شدة خشية المحاسبة بين يدي الله: والله لوددت أن الله عز وجل خلقني يوم خلقني شجرة تعضد ويؤكل ثمرها (فلا أحاسب على أعمالي بين يدي الله عزّ وجلّ) (حلية الأولياء ١/١٦٢) हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने अल्लाह के सामने पेशी और हिसाब-किताब …
اور پڑھوनबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम का सलाम करने वाले को जवाब देना
عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: ما من أحد يسلم علي إلا رد الله علي روحي حتى أرد عليه السلام (سنن أبي داود، الرقم:۲٠٤۱، وسنده جيد كما قال العراقي في المغني عن حمل الأسفار في الأسفار صـ ۳٦۷) رواه أحمد في رواية …
اور پڑھوअमर बिल मरूफ और नही अनिल मुन्कर की जिम्मेदारी नौवीं क़िस्त
चार जिम्मेदारियाँ दीन की सुरक्षा की बुनियाद दुनिया में दीन कायम करने के लिए अल्लाह तआला ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को चार बुनियादी जिम्मेदारियाँ देकर भेजा था। वे चार जिम्मेदारियाँ यह थीं: (1) उम्मत को कुरआन मजीद की तिलावत का सही तरीका सिखाना (2) उन्हें दीन की तालीम और …
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