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सालिहीन की इत्तेबाअ

प्यारो ! आदमी अपने आप से नहीं बढ़ता अल्लाह जल्ल शानुहु जैसे बढ़ावे वही बढ़ता है अपने आप को ख़ूब गिरावो, अपने समकालिन (मुआसिरीन) में से हर एक को अपने से बड़ा समझो...

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नमाज़ की सुन्नतें और आदाब – १०

नमाज़ से पेहले (१) नमाज़ के लिए मुनासिब कपड़े पेहनने का विशेष प्रबंध किया जाए. औरत को चाहिए के वह एसा लिबास पेहने, जो उस के पूरे बदन और बाल को छूपा ले. यह अदब के ख़िलाफ़ है के औरत एसा तंग और चुस्त लिबास पेहने जिस से उस के …

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अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की ज़िम्मे दारी – प्रकरण-१

इन्शा अल्लाह आईन्दा क़िस्तों में हम दीन के इस अहम विभाग (यअनी अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर) को क़ाईम करने की महत्तवता को बयान करेंगे. और साथ साथ हम उस से संबंघित मसाईल को भी बयान करेंगे. इसी तरह हम सहाबए किराम (रज़ि.) और अस्लाफ़ के उन वाक़ियात को ज़िकर करेंगे. जिन से हमें मालूम होगा के उन्होंने कैसै अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की यह बड़ी ज़िम्मेदारी अपने जिवन में अन्जाम दी है...

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नमाज़ की सुन्नतें और आदाब – ९

“नबिए करीम ‎‎(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के दौर में औरतों को हिदायत दी ‎गई थी के वह नमाज़ के दौरान अपने अंगो को जितना ज़्यादा हो ‎सके मिला कर रखें.‎”...

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क़यामत की अलामात (संकेत)- दूसरा प्रकरण

उलमाए किराम ने क़यामत की अलामतों को दो हिस्सों में तक़सीम किया हैः बड़ी अलामतें और छोटी अलामतें. छोटी अलामतों में सब से पेहली अलामत नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इस दुनिया से रिहलत (जाना) है और बड़ी अलामतों में सब से पेहली अलामत इमाम महदी (अलै.) का ज़ुहूर (ज़ाहिर होना) है...

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