हज़रत सहल बिन सअद (रज़ि) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा एक सहाबी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़िदमत में हाज़िर हुवे और आप से ग़रीबी तथा धन के अभाव की शिकायत. तो नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने उन से फ़रमाया के...
اور پڑھوहज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) – मोअज़िनों के सरदार
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: نعم المرء بلال، ولا يتبعه إلا مؤمن، وهو سيد المؤذنين (من أمتي)، وا…
फ़रिश्तों का नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में दुरूदो सलाम पहोंचाना
“नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की उम्मत में से जो शख़्स भी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम)…
जुम्आ के दिन कषरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की दुआ
हज़रत उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया …
दुरूद शरीफ़ जमा करने के लिए फ़रिश्तों का दुनिया में सैर करना
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाय…
दुआ से पेहले दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) …
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सहाबा-ए-किराम रद़ियल्लाहु अन्हुम के लिये हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाह अन्हु की दुआ
ذات مرة، طلب بعض الناس من سيدنا سعيد بن زيد رضي الله عنه أن يسبّ بعض الصحابة رضي الله عنهم، فقال سيدنا سعيد رضي الله عنه: تأمروني بسب إخواني، بل صلى الله عليهم (خصهم برحمته)، ثم تكلم عن فضلهم وبكى (المسند للشاشي، الرقم: ١٩٣) एक मर्तबा कुछ लोगो ने हज़रत …
اور پڑھوकर्ज़ की अदायगी में सहूलत का नुस्खा
शेखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक बात कहता हूं, अब उसको चाहे तुम मेरी नसीहत समझो, वसीयत समझो या तजुर्बा। वह यह कि अगर किसी से कर्ज़ लो तो देने की निय्यत खालिस रखो (कि उसको अदा करना ही है) और फिर वक़्त पर …
اور پڑھوबगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना
सवाल: क्या बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है? जवाब: बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है; मगर मस्जिद के आदाब में से है कि आदमी मस्जिद में बा-वुज़ू दाखिल हो और जब तक मस्जिद में रहे बा-वुज़ू रहे। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. وَمَن …
اور پڑھوमरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – १
मरीज से इयादत दीने-इस्लाम इस बात का हुक्म देता है कि इन्सान अल्लाह तआला के हुकूक और उसके बंदों के हुकूक को पूरा करे। बंदों के जो हुकूक इन्सान पर लाज़िम हैं, उनकी दो किस्म हैं: पहली किस्म = जो हर एक पर इन्फिरादी तौर पर लाज़िम हैं। उदाहरण के …
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