जो व्यक्ति अल्लाह तआला की विशेष रहमत का तालिब है उसे चाहिए के वह पांच वक़्त की नमाज़ें जमाअत के साथ पाबंदी के साथ मस्जिद में अदा करे, तमाम गुनाहों से बचना और मख़लुक के साथ शफ़क़त तथा हमदरदी के साथ पेश आए और उन के अधिकार अदा करे...
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7 days ago
मुलाक़ात के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है के नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “दो एसे मु…
7 days ago
मस्जिद में दाख़िल होने और मस्जिद से निकलने के समय दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عن فاطمة رضي الله عنها قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل المسجد صلى على محمد وسلم وقال …
7 days ago
फ़ज़र की नमाज़ और मग़रिब की बाद सो (१००) बार दुरूद शरीफ़
तो हज़रत उम्मे सुलैम (रज़ि.) ने एक शीशी ली और उस में आप (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का मुबारक पसीना जम…
2 weeks ago
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के चार मुअज़्ज़िन
حظي أربعة من الصحابة رضي الله عنهم بشرف كونهم مؤذني رسول الله صلى الله عليه وسلم. اثنان عينهما رسول …
2 weeks ago
हज़रत जिब्रील ‘अलैहिस्सलाम और रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की बद-दुआ
जो बुलंद आवाज़ से दुरूद शरीफ़ पढ़ेगा, उस को जन्नत मिलेगी, तो में ने और मजलिस के दीगर लोगों ने भी बुल…
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मुसलमानों के धार्मिक पतन पर सहानुभूति और चिंता व्यक्त करते हुए
दुनिया के नुक़सान को नुक़सान समझा जाता है लेकिन दीन के नुक़सान को नुक़सान नहीं समझा जाता, फिर हम पर आसमान वाला क्युं रहम करे, जब हमें मुसलमानों की दीनी हालत के अबतर होने पर रहम नहीं...
اور پڑھوनमाज़ की सुन्नतें और आदाब – ५
तकबीर कहें और मामूल के अनुसार दूसरे सजदे में जायें (दूसरा सजदा करें)...
اور پڑھو(४) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसअला
शहीद पर ग़ुसल वाजिब नहीं है, लिहाज़ा अगर किसी शख़्स को क़तल कर दिया गया हो, तो उस को उस के ख़ून के साथ दफ़न कर दिया जाएगा और उस को ग़ुसल देना वाजिब नहीं होगा, अगरचे...
اور پڑھوनबी ए करीम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की शफ़ाअत
नुज़हतुल मजालिस में लिखा है के बाज़ सुलहा में से एक साहब को हबसे बौल हो गया(पेशाब रूक गया). उन्होंने सपने में आरिफ़ बिल्लाह हज़रत शैख़ शिहाबुद्दीन इब्ने रसलान को जो बड़े ज़ाहिद और आलिम थे देखा और उन से...
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