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दूसरे अंबिया अलैहिमुस्सलाम के साथ रसूले करीम सल्लल्लाहु अलयहि ‎व-सल्लम पर दुरूद भेजना

जब तुम अंबिया (अलै.) पर दुरूद भेजो, तो उन के साथ मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि में भी रसूलों में से एक रसूल हुं...

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सुरतुल अस्र की तफ़सीर

क़सम है ज़माने की (१) बेशक इन्सान बड़े घाटे में है (२) सिवाए उन लोगों के जो और इमान लाए और अच्छे काम किए और एक दूसरे को हक़ बात की नसीहत करते रहे और एक दूसरे को सबर की नसीहत करते रहे (३)...

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मामूलात की पाबंदी

में ने अपने वालिद साहब और हज़रत मदनी दोनों को अख़ीर शब में तन्हाई में रोते और गिड़गिड़ाते हुए देखा यह दोनों बिलकुल एसा रोते थे जैसा मकतब में बच्चा पिट रहा हो...

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निकाह की सुन्नतें और आदाब – १२

अगर दुल्हा और दुल्हन (तथा दोनों के वकील) अलग अलग जगहों पर हों और उन के लिए एक ही जगह पर जमा होना अशक्य हो जहां निकाह की मजलिस आयोजित होगी, तो दुल्हन को चाहिए के वह किसी को अपना वकील बना दे और उस को अपना निकाह कराने की इजाज़त दे दे. जब वकील उस की तरफ़ से निकाह क़बूल कर ले, तो निकाह सहीह हो जाएगा...

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