सवाल – एक इमाम साहब ने रमज़ान के महीने में बीस रकआत तरावीह की नमाज़ पढ़ाई. तरावीह के दौरान इमाम साहब तशह्हुद में बैठे बग़ैर तीसरी रकअत के लिए खड़े हो कर चार रकआत के साथ नमाज़ को मुकम्मल कर ली, तो क्या तरावीह की यह चार रकआत दुरूस्त हुई. …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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क़यामत की अलामात (संकेत) – दूसरा प्रकरण
उम्मत के सामने क़यामत की अलामत को बयान करने का मक़सद हज़रत रसूले ख़ुदा (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत को क़यामत की बहोत सी छोटी और बड़ी अलामतों से आगाह किया है. उन में बहोत सी छोटी अलामतें गुज़िश्ता सदियों में ज़ाहिर हो चुकी हैं और बहोत सी छोटी …
اور پڑھوहज्ज और उमरह की सुन्नतें और आदाब – १०
इज़तिबाअ और रमल उमरह के तवाफ़ में मर्द इज़तिबाअ और रमल करेगा. इज़तिबाअ यह है के तवाफ़ करने वाला मर्द एहराम की चादर को दायीं बग़ल में से निकाल कर बायें कंधे पर ड़ालेगा और दाहना कंधा खुला छोडेगा. पूरे तवाफ़ में (यअनी सातों चक्करो में) मर्द इज़तिबाअ करेगा. और …
اور پڑھوहज्ज और उमरह की सुन्नतें और आदाब – ९
उमरे के तवाफ़ का तरीक़ा जब आप मस्जिदुल हराम पहोंचें, तो मस्जिद में दाख़िल होने की मस्नून दुआ पढ़ें फिर उमरह के लिए आगे बढ़ें. दो रकअत तहिय्यतुल मस्जिद न पढ़ें जैसा के आप दूसरी मस्जिदों में दाख़िल होने के बाद पढ़ते है, बलके सीघे तवाफ़े उमरह के लिए जाए, …
اور پڑھوहज्ज और उमरह की सुन्नतें और आदाब – ८
एहराम बांधने से पेहले दो रकअत नफ़ल नमाज़ अदा करना जब आप एहराम की चादर पेहन लें, तो एहराम की निय्यत बांधने से पेहले दो रकअत नफ़ल नमाज़ अदा करें, बशर्त यह के मकरूह वक़्त न हो. बेहतर यह है के आप पेहली रकअत में सुरए काफ़िरून और दूसरी रकअत …
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