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क़ुरआन मजीद में दुरूद का हुक्म

क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला ने अपने बन्दों को कुछ कामों का हुक्म दिया है, जैसे कि नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात वग़ैरह। इसी तरह क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें भी हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला अपने कुछ ख़ास बन्दों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई फ़रमाता है …

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सारा दारो-मदार हक़ त’आला के नज़दीक अच्छा होने पर है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: आदमी ख़्वाह कितना ही आलिम, ज़ाहिद और मुत्तक़ी व परहेज़गार हो लेकिन इस को यह क्या ख़बर कि मैं ख़ुदा के नज़दीक कैसा हूं। इस एह़्तेमाल के होते हुए कोई क्या दावा कर सकता है? क्योंकि सारा दारो-मदार …

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सबसे अफ़ज़ल हम्द और दुरूद

“ए अल्लाह ! तेरे ही लिए हम्द है जो तेरी शान के मुनासिब है पस तु मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) पर दुरूद भेज जो तेरी शान के मुनासिब है और हमारे साथ भी वह मामला कर जो तेरी शायाने शान हो. बेशक तु ही उस का मुस्तहिक़ है के तुझ से ड़रा जाए और मग़फ़िरत करने वाला है.”...

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नबियों के नाइब

हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब रहमतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा तालिबे-इल्मों से इरशाद फ़रमाया: “तुम अपनी क़द्र व क़ीमत तो समझो! दुनिया भर के ख़ज़ाने भी तुम्हारी क़ीमत नहीं। अल्लाह तआला के सिवा कोई भी तुम्हारी क़ीमत नहीं लगा सकता। तुम अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के नाइबीन (नाइब की जमा) हो, जो …

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