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मोहब्बत का बाग (किस्त: ८४)

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अज़ीम कुर्बानियां अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर अलग-अलग आज़माइश और इम्तिहान डाले और वे हर इम्तिहान और आज़माइश में पूरी तरह फ़रमां-बरदारी दिखाते हुए कामयाब हुए। दर-हकीकत हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की रज़ा के लिए जो अपनी ज़िंदगी में अज़ीम कुर्बानियां दी थीं, …

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मोहब्बत का बाग (किस्त: ८३)

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का रास्ता: अक्लमंदी का रास्ता कुरान-मजीद में अल्लाह तआला ने साफ़ तौर पर ऐलान फरमाया है कि जो शख्स हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के रास्ते से मुंह मोड़कर उसे छोड़ दे और किसी और रास्ते पर चले, तो हकीकत में वह बेवकूफ है, जो जहालत के रास्ते पर …

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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की दुआ

तबूूक के मौक़े पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम ने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए ख़ास तौर पर दुआ फ़रमाई: يرحم الله أبا ذر “अल्लाह त’आला अबू-ज़र पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाए!” (अल-मुस्तदरक लिल-हाकिम, रक़म: ४३७३) इस दुआ का पसमंज़र हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मस्’ऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु फ़रमाते हैं: जब रसूले-करीम …

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हज़रत अबू-ज़र ग़िफ़ारी रज़ियल्लाहु ‘अन्हु से अल्लाह त’आला की मोहब्बत

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم للصحابة رضي الله عنهم: إن الله أمرني بحب أربعة وأخبرني أنه يحبهم، قيل: يا رسول الله سمّهم لنا فقال صلى الله عليه وسلم: علي منهم يقول ذلك ثلاثا وأبو ذر والمقداد وسلمان أمرني بحبهم وأخبرني أنه يحبهم (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧١٨) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु …

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क़ियामत की निशानियां – आठवीं क़िस्त

दज्जाल की आमद (आने) से पहले उम्मत का गिरना हदीस शरीफ़ में आया है कि क़ियामत से पहले लोगों की ज़िंदगी का सब से पहला मक़सद और असल मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा माल जमा करना होगा। लोग माल को इस निगाह से देखेंगे कि माल ही तमाम राहतों और आसानी …

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