
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया:
हमारी तबलीग़ में काम करने वालों को तीन तबक़ों में तीन ही मक़ासिद के लिए ख़ुसूसियत से जाना चाहिए:
१. उ़लमा और सुलहा (अल्लाह के नेक बंदों) की ख़िदमत में दीन सीखने और दीन के अच्छे असरात लेने के लिए।
२. अपने से कम दर्जा के लोगों में दीनी बातों को फैलाने के ज़रिये अपनी तक्मील (मुकम्मल करना) और अपने दीन में रुसूख़ (मज़बूती) हासिल करने के लिए।
३. मुख्तलिफ गिरोहों में उनकी मुतफ़र्रिक़ (अलग-अलग) ख़ूबियाँ जज़्ब करने के लिए।
(मलफ़ूज़ात हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास रह़मतुल्लाहि अ़लैहि, पेज नंबर. ६०)
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