सवाल: मैंने तहिय्यतुल-मस्जिद की दो रकात नफ़्ल नमाज़ शुरू की और उसी दौरान फ़र्ज़ नमाज़ शुरू हो गई। मैंने फ़ौरन अपनी दो रकात नफ़्ल नमाज़ से निकलने के लिए सलाम फेर दिया। क्या मेरे ऊपर वाजिब है कि मैं उन दो रकात की क़ज़ा करूँ, जिनको मैंने शुरू करके तोड़ …
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