قال سيدنا علي رضي الله عنه عن سيدنا أبي ذر رضي الله عنه: وعى علما عجز فيه (عجز الناس عنه) (طبقات ابن سعد ٢/٣٥٤) हज़रत अली रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु के बारे में फ़रमाया: “उन्होंने ऐसा इल्म हासिल किया, जिसे दूसरे लोग हासिल नहीं कर सके।” हज़रत …
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सलात ‘अलन्नबी के मायने
‘उलमा ने यहाँ ‘सलात ‘अलन्नबी (नबी पर दरूद भेजने) के कई मायने बयान किए हैं। हर जगह जो मायने अल्लाह त’आला, फ़रिश्तों और मोमिनों के हाल के मुनासिब होंगे, वही मुराद लिए जाएँगे। कुछ ‘उलमा ने लिखा है कि “सलात ‘अलन्नबी” का मतलब नबी की सना (तारीफ़) और ताज़ीम, रहमत …
اور پڑھوमरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ३
(१) बीमार की इयादत करने से पहले वज़ू करना मुस्तहब है। हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स अच्छी तरह वुज़ू करे (यानी वुज़ू के तमाम सुन्नत और मुस्तहब तरीक़ों का पूरा ख़्याल रखे) और अज्र व सवाब की नीयत से …
اور پڑھوजुमे के दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने की महान फ़ज़ीलत
सहाबए किराम (रज़ि.) के दिलों में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की बे पनाह मोहब्बत...
اور پڑھوउस्ताद की बे-अदबी इल्म से महरूमी का सबब
शेख़ुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़्मतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “मेरी बड़े एहतिमाम से तुम लोगों से दरख़्वास्त है कि इल्म हासिल करने में जितनी भी तवाज़ु हो सके (करना), ज़बानी नहीं, बल्कि दिल से इख़्तियार करना। अगर चाहो कि इल्म हासिल हो जाए, तो उस्ताद का अदब …
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु के दिल में अल्लाह तअ़ाला के सामने हिसाब का ख़ौफ़
قال سيدنا أبو ذر رضي الله عنه من شدة خشية المحاسبة بين يدي الله: والله لوددت أن الله عز وجل خلقني يوم خلقني شجرة تعضد ويؤكل ثمرها (فلا أحاسب على أعمالي بين يدي الله عزّ وجلّ) (حلية الأولياء ١/١٦٢) हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु ने अल्लाह के सामने पेशी और हिसाब-किताब …
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