Monthly Archives: July 2026

इत्तिबा-ए-सुन्नत का एहतिमाम – ११

हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हज़रत हकीमुल-उम्मत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हाल के ज़माने के एक बहुत बड़े आलिमे-दीन और बुज़ुर्ग थे। हज़रत रह़्मतुल्लाही ‘अलैह सन १२८० हिजरी में थाना भवन में पैदा हुए और १६ रजब १३६२ हिजरी (मुताबिक २० जुलाई १९४३) को ८३ साल …

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फ़ज्र की सुन्नतों की क़ज़ा

सवाल: अगर मेरी फ़ज्र की नमाज़ क़ज़ा हो जाए और मैं सोकर उठने के बाद उसे ज़ुहर से पहले (यानी ज़वाल से पहले) पढ़ूँ, तो क्या मैं पहले फ़ज्र की दो रकात सुन्नत पढ़ूँ और फिर फ़र्ज़, या सिर्फ़ फ़र्ज़ पढ़ूँ? जवाब: अगर कोई आदमी उसी दिन की फ़ज्र की …

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क़यामत के दिन नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम के ‎पड़ोसी होने का शर्फ़

“जो शख़्स इरादा कर के मेरी ज़ियारत करे वह क़यामत में मेरे पड़ोस में होगा और जो शख़्स मदीना में क़याम करे और वहां की तंगी और तकलीफ़ पर सबर करे...

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वर्ल्ड कप देखना और वर्ल्ड कप के मैचों में टीमों को सपोर्ट करना

सवाल: मोहतरम मुफ़्ती साहब! मौजूदा फुटबॉल वर्ल्ड कप (Football World Cup) के बारे में यह पूछना है कि लोग अपनी पसंदीदा टीम की जीत के लिए दुआ करते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, सदक़ा देते हैं और कुछ लोग अपनी पसंदीदा टीम के गोल करने या मैच जीतने पर सज्दा करते …

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मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ​​३

(१) बीमार की इयादत करने से पहले वज़ू करना मुस्तहब है। हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स अच्छी तरह वुज़ू करे (यानी वुज़ू के तमाम सुन्नत और मुस्तहब तरीक़ों का पूरा ख़्याल रखे) और अज्र व सवाब की नीयत से …

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फज़ाइले-आमाल – ३७

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक काहिन के खाने से क़ै करना हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु का एक गुलाम था, जो गल्ला के तौर पर अपनी आमदनी में से हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अ़न्हु की खिदमत में पेश किया करता था । एक मर्तबा वह कुछ खाना लाया …

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क़ुरआन मजीद में दुरूद का हुक्म

क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला ने अपने बन्दों को कुछ कामों का हुक्म दिया है, जैसे कि नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात वग़ैरह। इसी तरह क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें भी हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला अपने कुछ ख़ास बन्दों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई फ़रमाता है …

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सारा दारो-मदार हक़ त’आला के नज़दीक अच्छा होने पर है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: आदमी ख़्वाह कितना ही आलिम, ज़ाहिद और मुत्तक़ी व परहेज़गार हो लेकिन इस को यह क्या ख़बर कि मैं ख़ुदा के नज़दीक कैसा हूं। इस एह़्तेमाल के होते हुए कोई क्या दावा कर सकता है? क्योंकि सारा दारो-मदार …

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सबसे अफ़ज़ल हम्द और दुरूद

“ए अल्लाह ! तेरे ही लिए हम्द है जो तेरी शान के मुनासिब है पस तु मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) पर दुरूद भेज जो तेरी शान के मुनासिब है और हमारे साथ भी वह मामला कर जो तेरी शायाने शान हो. बेशक तु ही उस का मुस्तहिक़ है के तुझ से ड़रा जाए और मग़फ़िरत करने वाला है.”...

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