हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बुलंद मकाम अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के तमाम बंदों में से नबियों (पैग़ंबरों) का इस्लाम सबसे ऊंचे और सबसे बेहतर दर्जे का था। अल्लाह तआला ने उन्हें इन्सानियत की रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए चुना था और उन्हें दुनिया में इस मकसद के लिए भेजा कि वे लोगों को …
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मुसीबतों के वक़्त सब्र करना
हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: सब कारकुनों को समझा दो कि इस राह में बलाओं और तकलीफ़ों को ख़ुदा से मांगें तो हरगिज़ नहीं (बंदा को अल्लाह से हमेशा आफ़ियत ही मांगनी चाहिए; लेकिन अगर अल्लाह पाक इस राह में यह मुसीबतें भेज दे, …
اور پڑھوनबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की शफ़ाअत
नुज़हतुल मजालिस में लिखा है के बाज़ सुलहा में से एक साहब को हबसे बौल हो गया(पेशाब रूक गया). उन्होंने सपने में आरिफ़ बिल्लाह हज़रत शैख़ शिहाबुद्दीन इब्ने रसलान को जो बड़े ज़ाहिद और आलिम थे देखा और उन से...
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