Monthly Archives: June 2026

फज़ाइले-सदकात – २९

हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह की सख़ावत हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु की जानिब से ह़िम्स के हाकिम (गवर्नर) थे। अहले-ह़िम्स ने हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु से इनकी मुतअद्दद शिकायतें कीं और इनके माज़ूल करने की दख़्र्वास्त की। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु को हक तआला शानुहू ने फिरासत …

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दूसरे अंबिया अलैहिमुस्सलाम के साथ रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि ‎व-सल्लम पर दुरूद भेजना

जब तुम अंबिया (अलै.) पर दुरूद भेजो, तो उन के साथ मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि में भी रसूलों में से एक रसूल हुं...

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दुरूद-शरीफ न पढ़ना क़ियामत के दिन हसरत और अफ़सोस का सबब

हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़्वाब में ज़ियारत हुई के हुज़ूरे अकद़स (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़िदमत में शिब्ली हाज़िर हुए, हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) खड़े हो गए और उन की पेशानी को बोसा दिया और मेरे इसतिफ़सार (बहोत ज़्यादा पूछने) पर हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के...

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मोहब्बत का बाग (किस्त: ८४)

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अज़ीम कुर्बानियां अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर अलग-अलग आज़माइश और इम्तिहान डाले और वे हर इम्तिहान और आज़माइश में पूरी तरह फ़रमां-बरदारी दिखाते हुए कामयाब हुए। दर-हकीकत हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की रज़ा के लिए जो अपनी ज़िंदगी में अज़ीम कुर्बानियां दी थीं, …

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मोहब्बत का बाग (किस्त: ८३)

हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का रास्ता: अक्लमंदी का रास्ता कुरान-मजीद में अल्लाह तआला ने साफ़ तौर पर ऐलान फरमाया है कि जो शख्स हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के रास्ते से मुंह मोड़कर उसे छोड़ दे और किसी और रास्ते पर चले, तो हकीकत में वह बेवकूफ है, जो जहालत के रास्ते पर …

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हज़रत अबू-ज़र ग़िफ़ारी रज़ियल्लाहु ‘अन्हु से अल्लाह त’आला की मोहब्बत

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم للصحابة رضي الله عنهم: إن الله أمرني بحب أربعة وأخبرني أنه يحبهم، قيل: يا رسول الله سمّهم لنا فقال صلى الله عليه وسلم: علي منهم يقول ذلك ثلاثا وأبو ذر والمقداد وسلمان أمرني بحبهم وأخبرني أنه يحبهم (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧١٨) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु …

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हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की दुआ

तबूूक के मौक़े पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम ने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु ‘अन्हु के लिए ख़ास तौर पर दुआ फ़रमाई: يرحم الله أبا ذر “अल्लाह त’आला अबू-ज़र पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाए!” (अल-मुस्तदरक लिल-हाकिम, रक़म: ४३७३) इस दुआ का पसमंज़र हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मस्’ऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु फ़रमाते हैं: जब रसूले-करीम …

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क़ियामत की निशानियां – आठवीं क़िस्त

दज्जाल की आमद (आने) से पहले उम्मत का गिरना हदीस शरीफ़ में आया है कि क़ियामत से पहले लोगों की ज़िंदगी का सब से पहला मक़सद और असल मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा माल जमा करना होगा। लोग माल को इस निगाह से देखेंगे कि माल ही तमाम राहतों और आसानी …

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मोहब्बत का बाग (किस्त: ८२)

“खलीलुल्लाह” के लक़ब से नवाज़ा जाना तमाम नबियों में से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को “खलीलुल्लाह” (अल्लाह के खास दोस्त) के खिताब से नवाज़ा गया। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को यह शर्फ कैसे मिला, इसके बारे में अल्लामा इब्ने-कसीर रह़िमहुल्लाह ने यह वाक्या बयान किया है: हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह आदत-ए-शरीफा …

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उम्मत का दुरूद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम तक पहुंचना

अपने घरों को क़ब्रस्तान न बनावो (घरों को नेक आमालः नमाज़, तिलावत और ज़िक्र वग़ैरह से आबाद रखो. उन को क़ब्रस्तान की तरह मत बनावो जहां नेक आमाल नही होते हैं) और मेरी क़बर को जशन की जगह मत बनावो और मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि तुम्हारा दुरूद मेरे पास (फ़रिश्तों के ज़रीए) पहोंचता है, चाहे तुम जहां कहीं भी हो...

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