मौलवीओ ! तुम को मालूम है हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) बड़े ताजिर थे. उन्होंने अपना सब कुछ हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) और आप के ख़ादिमों पर ख़र्च कर दिया...
اور پڑھوMonthly Archives: December 2020
मुहब्बत का बग़ीचा (पेहला प्रकरण)
लिहाज़ा हमारे लिए ज़रूरी है के हम अपने निर्माता और मालिक अल्लाह तआला को पेहचानें, उन की प्रकृति तथा महानता और जलाल तथा जमाल पर विचार करें के अल्लाह तआला अपनी मख़लूक़ से किस क़दर मुहब्बत फ़रमाते हैं के वह हमें गुनाहों और नाफ़रमानियों के बावुजूद दिन और रात बेशुमार नेमतें अता फ़रमा रहे हैं और हमारे ऊपर बेशुमार एहसानात कर रहे हैं...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-३)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर(रज़ि.) फ़रमाते हैं के “रसूलुल्लाह (सल्लललाहु अलयहि वसल्लम) ने मस्जिद में बैतबाज़ी(अंत्याक्षरी), खरीदो फ़रोख़्त(ख़रीदना तथा बैचना) और मस्जिद में जुम्आ के दिन नमाज़ से पेहले हलक़ा लगाने से मना किया है(चुंके हलक़े की हालत पर बैठना ख़ुत्बे की तरफ़ ध्यान केंन्द्रीत करने से मानेअ है).”...
اور پڑھوजनाज़े की नमाज़ में दैर से आना
(१) अगर कोई व्यक्ति जनाज़े की नमाज़ में इतनी दैर से पहुंचे के इमाम साहब एक या एक से अधिक तकबीरें संपूर्ण कर चुके हों, तो उस को “मसबूक़” (दैर से पहुंचने वाला) कहा जाएगा....
اور پڑھوउसूल की पाबंदी
“दुनिया में कोई साधारण से साधारण काम भी सिद्धांत का पालन और उचित प्रकिया अपनाए बग़ैर नही होता. जहाज़, नाव, रेल, मोटर सब सिद्धांत से ही चलते हैं यहां तक की सालन रोटी तक भी सिद्धांत से ही पकती है.”
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