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फज़ाइले-सदकात – २८

एक चरवाहे का तकवा नाफे रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु अन्हु एक दफा मदीना-मुनव्वरा से बाहर तशरीफ ले जा रहे थे, ख़ुद्दाम साथ थे, खाने का वक़्त हो गया। ख़ुद्दाम ने दस्तरख़्वान बिछाया। सब खाने के लिए बैठे। एक चरवाहा बकरियां चराता हुआ गुज़रा, उसने सलाम किया। …

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हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु की तवाज़ु

كان الناس يأتون سيدنا بلالا رضي الله عنه ويذكرون فضله وما قسم الله له من الخير، فيقول بتواضع: إنما أنا حبشي كنت بالأمس عبدا (طبقات ابن سعد ٣/١٨٠) जब लोग हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के पास आते और उन की खूबियां की तारीफ करते और इन खैर-ओ-भलाई का ज़िक्र करते, …

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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम का जन्नत में हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु के जूतों की आवाज़ सुनना

ذات مرة، قال رسول الله صلى الله عليه وسلم لسيدنا بلال رضي الله عنه: سمعت الليلة خشف نعليك بين يدي في الجنة (في رؤيا أريته) (من صحيح مسلم، الرقم: 2458) ​रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम ने एक मर्तबा हज़रत बिलाल रद़ियल्लाहु अन्हु को मुख़ातिब कर के फ़रमाया: ​”गुज़िश्ता रात (ख़्वाब में) …

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