हज़रत अनस (रज़ि.) के दिल में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इतनी ज़्यादा मोहब्बत थी के उन्होंने अपने आप को नबीये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के बग़ैर इस दुन्या में रेहने के क़ाबिल नहीं समझा...
اور پڑھوनमाज़ में दुरूद शरीफ़
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से रिवायत है के “रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने हमें तशह्हुद की दुआ (अत तहिय्यातुत तय्यिबातुज़ ज़ाकियातु अख़ीर तक) सिखाते थे (और उस के बाद फ़रमाते के तशह्हुद की दुआ पढ़ने के बाद) दुरूद शरीफ़ पढ़ना चाहिए.”...
اور پڑھوजुमे के दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने की महान फ़ज़ीलत
सहाबए किराम (रज़ि.) के दिलों में रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की बे पनाह मोहब्बत...
اور پڑھوक़यामत के दिन हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से मुसाफ़हा
नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का इरशाद है के “जो मुझ पर हर दिन पचास बार दुरूद भेजता है, में उस से क़यामत के दिन मुसाफ़हा करूंगा.”...
اور پڑھوदस गुना षवाब
عَنْ أَبِي طَلْحَةَ رَضِيَ اللهُ عَنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَ ذَاتَ يَوْمٍ وَالْبِشْرُ يُرَى فِي وَجْهِهِ فَقَالَ إِنَّهُ جَاءَنِي جِبْرِيلُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَمَا يُرْضِيكَ يَا مُحَمَّدُ أَنْ لَا يُصَلِّيَ عَلَيْكَ أَحَدٌ مِنْ أُمَّتِكَ إِلَّا صَلَّيْتُ عَلَيْهِ عَشْرًا وَلَا يُسَلِّمَ عَلَيْكَ أَحَدٌ مِنْ أُمَّتِكَ إِلَّا سَلَّمْتُ عَلَيْهِ عَشْرًا (النسائى رقم ۱۲۸۳..
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