दुरूद शरीफ

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम का सलाम करने वाले को जवाब देना

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: ما من أحد يسلم علي إلا رد الله علي روحي حتى أرد عليه السلام (سنن أبي داود، الرقم:۲٠٤۱، وسنده جيد كما قال العراقي في المغني عن حمل الأسفار في الأسفار صـ ۳٦۷) رواه أحمد في رواية …

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क़यामत के दिन नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैही व-सल्लम के ‎पड़ोसी होने का शर्फ़

“जो शख़्स इरादा कर के मेरी ज़ियारत करे वह क़यामत में मेरे पड़ोस में होगा और जो शख़्स मदीना में क़याम करे और वहां की तंगी और तकलीफ़ पर सबर करे...

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सबसे अफ़ज़ल हम्द और दुरूद

“ए अल्लाह ! तेरे ही लिए हम्द है जो तेरी शान के मुनासिब है पस तु मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) पर दुरूद भेज जो तेरी शान के मुनासिब है और हमारे साथ भी वह मामला कर जो तेरी शायाने शान हो. बेशक तु ही उस का मुस्तहिक़ है के तुझ से ड़रा जाए और मग़फ़िरत करने वाला है.”...

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दूसरे अंबिया अलैहिमुस्सलाम के साथ रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि ‎व-सल्लम पर दुरूद भेजना

जब तुम अंबिया (अलै.) पर दुरूद भेजो, तो उन के साथ मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि में भी रसूलों में से एक रसूल हुं...

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दुरूद-शरीफ न पढ़ना क़ियामत के दिन हसरत और अफ़सोस का सबब

हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़्वाब में ज़ियारत हुई के हुज़ूरे अकद़स (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़िदमत में शिब्ली हाज़िर हुए, हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) खड़े हो गए और उन की पेशानी को बोसा दिया और मेरे इसतिफ़सार (बहोत ज़्यादा पूछने) पर हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के...

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उम्मत का दुरूद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम तक पहुंचना

अपने घरों को क़ब्रस्तान न बनावो (घरों को नेक आमालः नमाज़, तिलावत और ज़िक्र वग़ैरह से आबाद रखो. उन को क़ब्रस्तान की तरह मत बनावो जहां नेक आमाल नही होते हैं) और मेरी क़बर को जशन की जगह मत बनावो और मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि तुम्हारा दुरूद मेरे पास (फ़रिश्तों के ज़रीए) पहोंचता है, चाहे तुम जहां कहीं भी हो...

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नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की शफ़ाअत

नुज़हतुल मजालिस में लिखा है के बाज़ सुलहा में से एक साहब को हबसे बौल हो गया(पेशाब रूक गया). उन्होंने सपने में आरिफ़ बिल्लाह हज़रत शैख़ शिहाबुद्दीन इब्ने रसलान को जो बड़े ज़ाहिद और आलिम थे देखा और उन से...

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हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद

अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने वज़ीर से कहा उस आदमी को तेरे पास रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने भेजा है. वज़ीर खुशी से उठ खड़ा हुवा उसे अपनी जगह पर बिठाया और पूरा क़िस्सा पूछा. उस को पूरा ख़्वाब सुनाया...

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