‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात पांचवीं अलामत: उलमा-ए-आख़िरत की यह है कि सलातीन और हुक्काम से दूर रहें, (बिला ज़रूरत के) उनके पास हरगिज़ न जाएं, बल्कि वो ख़ुद भी आएं, तो मुलाकात कम रखें। इसलिए कि उनके साथ मेल-जोल, उनकी खुशनूदी और रिज़ा-जोई में तकल्लुफ बरतने से खाली न होगा। …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ९
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात चौथी अलामत: चौथी अलामत आख़िरत के उलमा की यह है कि खाने पीने की और लिबास की उम्दगियों और बेहतराईयों की तरफ मुतवज्जह न हो, बल्कि इन चीज़ों में दरमियानी रफ़्तार इख़्तियार करे और बुजुर्गों के तर्ज़ को इख़्तियार करे। इन चीज़ों में जितना कमी की …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ८
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात तीसरी अलामत तीसरी अलामत यह है कि ऐसे ‘उलूम में मशगूल हो जो आख़िरत में काम आने वाले हों, नेक कामों में रग्बत पैदा करने वाले हों, ऐसे उलूम से इह़्तिराज़ करे (बचें) जिनका आख़िरत में कोई नफा नहीं है या नफा कम है। हम लोग …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ७
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात दूसरी अलामत दूसरी अलामत यह है कि उसके कौल व फेल (कहने और करने) में तआरूज़ (इख़्तिलाफ) न हो, दूसरों को खैर का हुक्म करे और खुद उस पर अमल न करे। हक तआला शानुहू का इर्शाद है:- أَتَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبِرِّ وَتَنسَوْنَ أَنفُسَكُمْ وَأَنتُمْ تَتْلُونَ الْكِتَابَ …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ६
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह निशानियाँ इमाम गज़ाली रहिमहुल्लाह फरमाते हैं कि जो आलिम दुनियादार हो वह अह़वाल (हालत,परिस्थिति,मुआमले) के एतिबार से जाहिल से ज़्यादा कमीना है और अज़ाब के एतिबार से ज़्यादा सख़्ती में मुब्तला होगा और कामयाब और अल्लाह-तआला के यहां मुकर्रब उलमा-ए-आख़िरत हैं जिनकी चंद आलमतें हैं। पहेली अलामत: …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ५
अपने आमाल को हकीर समझना सदका देने के बारे में एक अदब यह है कि अपने सदके को ह़कीर समझे, उसको बड़ी चीज़ समझने से ‘उज्ब (खुद पसंदी) पैदा होने का अंदेशा है, जो बड़ी हलाकत की चीज़ है और नेक आमाल को बर्बाद करने वाली है। हक तआला शानुहू …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ४
सिला-रहमी हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफा रज़ि० फरमाते हैं कि हम शाम को हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में हल्के के तौर पर चारों तरफ बैठे थे। हुजूर सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम ने फरमाया कि मज्मे में कोई शख़्स कता-रहमी करने वाला हो तो वह उठ जाए, हमारे …
اور پڑھوफज़ाइले सदकात – २
अल्लाह त’आला की नेमतें एक हदीस में है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह सूरत (सूरह तकाषुर) तिलावत फरमायी और जब यह पढ़ा – ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ फिर उस दिन, नेमतों से सवाल किए जाओगे। तो इर्शाद फरमाया कि तुम्हारे रब के सामने तुमसे ठंडे पानी का …
اور پڑھوफज़ाइले सदकात – ૧
वालिदैन का ऐहतिराम हज़रत तल्हा रज़ि० फरमाते हैं कि हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की खिदमत में एक शख़्स हाज़िर हुए और जिहाद में शिर्कत की दख्र्वास्त की। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, तुम्हारी वालिदा ज़िंदा हैं? उन्होंने अर्ज किया, ज़िंदा हैं। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया …
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