फज़ाइले सदकात

फज़ाइले-सदकात – ३०

अब्दुल हमीद बिन-सा’द की सखावत एक मर्तबा मिसर में कहत पड़ा। अब्दुल हमीद बिन-सा’द मिस्र के हाकिम थे, कहने लगे: मैं शैतान को बताऊँगा कि मैं उसका दुश्मन हूँ (वह ऐसे वक़्त में बहुत एहतियात से ख़र्च करने की तर्गीब देता है।)मिस्र में जितने फुकरा नादार थे, सबका खाना मेरे …

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फज़ाइले-सदकात – २९

हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह की सख़ावत हज़रत सईद बिन-आमिर रह़िमहुल्लाह हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु की जानिब से ह़िम्स के हाकिम (गवर्नर) थे। अहले-ह़िम्स ने हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु से इनकी मुतअद्दद शिकायतें कीं और इनके माज़ूल करने की दख़्र्वास्त की। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अ़न्हु को हक तआला शानुहू ने फिरासत …

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फज़ाइले-सदकात – २८

एक चरवाहे का तकवा नाफे रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु अन्हु एक दफा मदीना-मुनव्वरा से बाहर तशरीफ ले जा रहे थे, ख़ुद्दाम साथ थे, खाने का वक़्त हो गया। ख़ुद्दाम ने दस्तरख़्वान बिछाया। सब खाने के लिए बैठे। एक चरवाहा बकरियां चराता हुआ गुज़रा, उसने सलाम किया। …

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फज़ाइले-सदकात – २७

हब्शी गुलाम और सखावत हज़रत अब्दुल्लाह बिन-जाफ़र रद़ियल्लाहु ‘अन्हुमा एक मर्तबा मदीना-मुनव्वरह के एक बाग़ पर गुज़रे, उस बाग में हब्शी गुलाम बाग़ का रखवाली था, वह रोटी खा रहा था और एक कुत्ता उसके सामने बैठा हुआ था। जब वह एक लुक़्मा बना कर अपने मुंह में रखता तो …

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फज़ाइले-सदकात – २६

ईसार का अजीब वाकिआ वाक़िदी रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि मेरे दो दोस्त थे, एक हाशमी और एक गैर हाशमी, हम तीनों में ऐसे गहरे ताल्लुक़ात थे कि एक जान, तीन कालिब थे। मेरे ऊपर सख़्त तंगी थी, ईद का दिन आ गया, बीवी ने कहा कि हम तो हर हाल …

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फज़ाइले-सदकात – २५

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाह अन्हुमा की सखावत अबान बिन-उस्मान रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि एक शख़्स ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाहु अन्हुमा को परेशान और ज़लील करने के लिए यह हरकत की कि कुरैश के सरदारों के पास जाकर यह कहा कि इब्ने-अब्बास (रद़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कल सुबह आपकी …

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फज़ाइले-सदकात – २४

हज़रत आइशा रद़ियल्लाहु अन्हा की सखावत हज़रत मुन्कदिर रह़िमहुल्लाह एक मर्तबा हज़रत आइशा रद़ियल्लाहु अन्हा की खिदमत में हाज़िर हुए और अपनी सख़्त हाजत का इज़हार किया, उन्होंने फरमाया कि मेरे पास इस वक़्त बिल्कुल कुछ नहीं है, अगर मेरे पास दस हज़ार भी होते तो सब के सब तुम्हें …

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फज़ाइले-सदकात – २३

हज़रत अब्दुल्लाह बिन जाफर रद़ियल्लाहु अन्हु की सखावत एक शख़्स ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन जाफर रद़ियल्लाहु अन्हु की ख़िदमत में हाज़िर होकर दो शे’र पढ़े, जिनका मतलब यह है कि: एहसान और हुस्ने-सुलूक उस वक़्त एहसान है जबकि वह उसके अहल और काबिल लोगों पर किया जाये। नालायकों पर एहसान …

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फज़ाइले-सदकात – २१

अब्दुल्लाह बिन आमिर बिन कुरेज़ रज़ियल्लाहु अन्हु हज़रत उस्मान रजि. के चचाज़ाद भाई, एक मर्तबा (ग़ालिबन रात का वक़्त होगा) मस्जिद से बाहर आये,अपने मकान तन्हा जा रहे थे। रास्ते में एक नौजवान लड़का नज़र पड़ा, वह उनके साथ हो लिया। उन्होंने फरमाया कि तुम्हें कुछ कहना है? उसने अर्ज़ …

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फज़ाइले-सदकात – २०

हज़रत इमाम हसन रज़ि., इमाम हुसैन रज़ि. और हज़रत अब्दुल्लाह बिन जाफर रज़ि. की सख़ावत अबुल हसन मदाइनी रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हज़रत इमाम हसन रज़ि., इमाम हुसैन रज़ि. और हज़रत अब्दुल्लाह बिन जाफर रज़ि. हज के लिऐ तशरीफ़ ले जा रहे थे, रास्ते में उनके सामान के ऊँट उनसे …

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