फज़ाइल आमाल

फज़ाइले-आमाल – ૨૮

हज़रत उमर फ़ारूक़ रद़ियल्लाह अन्हु का बैतुलमाल से वज़ीफ़ा हजरत उमर रद़ियल्लाह अन्हु भी तिजारत किया करते थे। जब खलीफ़ा बनाये गये तो बैतुल माल से वजीफ़ा मुक़र्रर हुआ। मदीना-ए-तय्यबा में लोगों को जमा फ़रमा कर इर्शाद फ़रमाया कि मैं तिजारत किया करता था। अब तुम लोगों ने इसमें मश्गूल …

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फज़ाइले-सदकात – ૨૨

एक दरख़्त के बदले में जन्नत में खजूर का दरख़्त मिलना हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाह अन्हु फरमाते हैं कि एक शख़्स के मकान में खजूर का एक दरख़्त खड़ा था, जिसकी शाख पड़ोसी के मकान पर भी लटक रही थी। वह पड़ोसी गरीब आदमी था। जब यह शख़्स अपने …

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फज़ाइले-आमाल – ૨૭

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रद़ियल्लाहु अन्हु का बैतुलमाल से वज़ीफ़ा हजरत अबूबक्र सिद्दीक़ रद़ियल्लाहु अन्हु के यहां कपड़े की तिजारत होती थी और इसी से गूज़र-औक़ात था। जब खलीफ़ा बनाये गए तो हस्बे-मामूल सुबह को चन्द चादरें हाथ पर डालकर बाजार में फ़रोख्त के लिए तशरीफ़ ले चले। रास्ते में हजरत …

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फज़ाइले-आमाल – २६

हज़रत अबूहुरैरह रज़ि० की भूख में हालत हजरत अबूहरैरह रजि० एक मर्तबा कत्तान के कपड़े में नाक साफ़ करके फ़रमाने लगे: क्या कहने अबूहुरैरह के, आज कत्तान के कपड़ में नाक साफ़ करता है, हालांकि मुझे वह जमाना भी याद है जब हुजूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिम्बर और …

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फज़ाइले-आमाल – २५

हज़रत उमर रज़ि० के वुस्अत तलब करने पर तंबीह और हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) के गुज़र की हालत बीवियों की बाज़ ज़्यादतियों पर एक मर्तबा हुज़ूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने क़सम खा ली थी कि एक महीने तक उनके पास न जाऊंगा, ताकि उनको तंबीह हो और अलाहिदा ऊपर एक …

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फज़ाइले-आमाल – २४

तीसरा बाब सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम अज्मईन के ज़ुह्द्द और फ़क़र के बयान में इस बारे में खुद नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपना मामूल और वाक़िआत, जो इस अम्र पर दलालत करते हैं कि यह चीज हुज़र सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की खुद इख्तियार फ़रमायी हुई और पसन्द की हुई …

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फज़ाइले-आमाल – २०

सहाबा रद़ियल्लाहु अन्हुम के हंसने पर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की तंबीह और क़ब्र की याद नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम एक मर्तबा नमाज़ के लिए तशरीफ़ लाए, तो एक जमाअत को देखा कि वह खिलखिला कर हंस रही थी और हंसी की वजह से दांत खिल रहे थे। हुजूर सल्लल्लाहु …

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फज़ाइले-आमाल – १९

तबूक के सफ़र में क़ौमें समूद की बस्ती पर गुज़र गज़्व-ए-तबूक मशहूर गज़्वह है और नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का आखिरी गज़्वह है। (गज़्वह=गज़्वह उस लड़ाई को कहते हैं, जिसमें हुजूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम खुद शरीक हुए हों) हुजूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को इत्तिला (ख़बर) मिली कि रूम का बादशाह …

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फज़ाइले-आमाल – १८

हज़रत इब्ने अब्बास रद़ियल्लाहु अन्हुमा की नसीहत वहब बिन मुनब्बह रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रद़ियल्लाहु अन्हुमा की ज़ाहिरी बीनाई (आंखो की रौशनी) जाने के बाद, मैं उनको ले जा रहा था। वह मस्जिदे ह़राम में तशरीफ़ ले गए। वहां पहुंचकर एक मज्मे’ से कुछ झगड़े की …

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फज़ाइले-आमाल – १७

हज़रत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हू की हालत आप रद़िय अल्लाहु अन्हु के गुलाम हजरत अस्लम रह़िमहुल्लाह कहते हैं कि मैं एक मर्तबा हजरत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हु के साथ ह़र्रा की तरफ़ जा रहा था। (ह़र्रा= मदीना के करीब एक जगह का नाम है।) एक जगह आग जलती हुई जंगल …

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