तालीम

फज़ाइले-आमाल – १०

दूसरा बाब: अल्लाह जल्ल जलालुहू व ‘अम्म नवालुहू का ख़ौफ़ और डर दीन के साथ इस जांफ़िशानी के (जान छिड़कने के) बावजूद, जिसके क़िस्से अभी गुज़रे और दीन के लिए अपनी जान व माल, आबरू सब कुछ फ़ना कर देने के बाद जिसका नमूना अभी आप देख चुके हैं, अल्लाह …

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फज़ाइले-आमाल – ९

हज़रत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हू का क़िस्सा हज़रत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हू जिनके पाक नाम पर आज मुसलमानों को फख्र है। और जिनके जोशे-ईमानी से आज तेरह सौ वर्ष बाद तक काफ़िरों के दिल में ख़ौफ़ है, इस्लाम लाने से क़ब्ल मुसलमानों के मुक़ाबले और तकलीफ़ पहुंचाने में भी मुमताज़ …

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फज़ाइले-आमाल – ८

हज़रत सुहैब रद़िय अल्लाहु अन्हु का इस्लाम हजरत सुहैब रद़िय अल्लाहु अन्हु भी हजरत अम्मार रद़िय अल्लाहु अन्हु ही के साथ मुसलमान हुए।नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अरक़म रद़िय अल्लाहु अन्हु के मकान पर तशरीफ़ फ़रमा थे कि ये दोनों हज़रात अलाह़िदा अलाह़िदा हाज़िर-ए-खिदमत हुए और मकान के दरवाज़े पर …

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फज़ाइले-आमाल – ७

हज़रत ‘अम्मार रद़िय अल्लाहु अन्हु और उनके वालिदैन का ज़िक्र हजरत अम्मार रद़िय अल्लाहु अन्हु और उनके मां-बाप को भी सख्त से सख्त तक्लीफ़ें पहुंचाई गईं। मक्का की सख्त गर्म और रेतीली ज़मीन में उनको अज़ाब दिया जाता और हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का उस तरफ़ गुजर होता तो …

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फज़ाइले-सदकात – ५

अपने आमाल को हकीर समझना सदका देने के बारे में एक अदब यह है कि अपने सदके को ह़कीर समझे, उसको बड़ी चीज़ समझने से ‘उज्ब (खुद पसंदी) पैदा होने का अंदेशा है, जो बड़ी हलाकत की चीज़ है और नेक आमाल को बर्बाद करने वाली है। हक तआला शानुहू …

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फज़ाइले-आमाल – ६

हज़रत खब्बाब बिन अल-अरत्त रद़ियल्लाहु ‘अन्हु की तकलीफ़ें हज़रत खब्बाब बिन अल-अरत्त रद़ियल्लाहु ‘अन्हु भी उन्हीं मुबारक हस्तियों में हैं, जिन्होंने इम्तिहान के लिए अपने आप को पेश किया था और अल्लाह के रास्ते में सख्त से सख्त तक्लीफ़ें बर्दाश्त की। शुरू ही में पांच-छः आदमियों के बाद मुसलमान हो …

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फज़ाइले-आमाल – ५

हज़रत अबूज़र ग़िफ़ारी का इस्लाम हजरत अबू ज़र गिफ़ारी रद़ियल्लाहु ‘अन्हु मशहूर सहाबी हैं, जो बाद में बड़े जाहिदों और बड़े उलेमा में से हुए। हज़रत अली कर्रमल्लाहु वज्हहू का इर्शाद है कि अबूजर (रद़ियल्लाहु ‘अन्हु) ऐसे इल्म को हासिल किए हुए हैं, जिससे लोग आजिज़ हैं, मगर उन्होंने इसको …

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फज़ाइले-सदकात – ४

सिला-रहमी हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफा रज़ि० फरमाते हैं कि हम शाम को हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में हल्के के तौर पर चारों तरफ बैठे थे। हुजूर सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम ने फरमाया कि मज्मे में कोई शख़्स कता-रहमी करने वाला हो तो वह उठ जाए, हमारे …

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फज़ाइले-आमाल – ४

हज़रत बिलाल हब्शी र’दि अल्लाहु अन्हू का इस्लाम और मसाइब हजरत बिलाल हब्शी र’दि अल्लाहु अन्हू एक मशहूर सहाबी हैं, जो मस्जिदे नबुवी के हमेशा मुअज्जिन रहे। शुरू में एक काफ़िर के गुलाम थे, इस्लाम ले आये जिसकी वजह से तरह-तरह की तकलीफें दिये जाते थे। (मुअज्जिन=अज़ान देने वाले) उमैया …

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फज़ाइले सदकात – ૧

वालिदैन का ऐहतिराम हज़रत तल्हा रज़ि० फरमाते हैं कि हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की खिदमत में एक शख़्स हाज़िर हुए और जिहाद में शिर्कत की दख्र्वास्त की। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, तुम्हारी वालिदा ज़िंदा हैं? उन्होंने अर्ज किया, ज़िंदा हैं। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया …

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